शुक्रवार, 6 अप्रैल 2018

अंत्योदय, बरिस्ता और बैरिस्टर


अंत्योदय दीन दयाल जी का स्वप्न था , उनका अंत्योदय बस्तियों से बरिस्ता तक कब पहुँचा पता ही न चला ।
ऐसा नहीं है कि बरिस्ता नहीं पहुंचना चाहिए, पर बस्तियों से नहीं हटना चाहिए ।
चाय के नुक्कडों से शुरू हुआ यह सफ़र बरिस्ता तक पहुंचा बड़े आनंद की बात है |


दीन दयाल जी अगर होते तो तपती धूप में बदन जलाकर पसीने से नहाये हुए मजदूरों को चाय के नुक्कड़ों की जगह बरिस्ता में कॉफी पीते देखकर झूम उठते।
हालाँकि बरिस्ता का लोगो और अंबीएन्स ही ऐसा है कि जैसे भगवा रंग में रंगा हुआ भाजपा का कार्यालय हो । सब भगवा रंगा हुआ है ।

चुनाव के गरम माहौल में बरिस्ता की आइसक्रीम जीवन में ठंडक ला सकती है ।
हो सकता है अगले चुनाव ,जो कि मई में होंगे, उसको बरिस्ता ही स्पोंसर कर दे । हर वोट देने वाले को एक आइस क्रीम ही मिल जाये ।
हालाँकि भारत के लोग चाय तो कितनी भी गर्मी हो पीते ही हैं ।

और चाय के नुक्कड़ भी देश भर में बरिस्ताओं से तो कम नही होंगे । शायद वहां पार्टी का झंडा उठाने के लिए चार से ज्यादा लोग मिल जाते ।
अब देश में पैसा भी तो ले दे के चार लोगों के पास ही है बरिस्ता में जाने लायक।बरिस्ता से झंडा उठाने का फायदा यह है की आपका ऊपर वालों से रिश्ता बना रहेगा |

लेकिन जब झंडा उठाने के लिए कोई गरीब न मिले तो टटोलना चाहिए कि कहीं गरीबों से कट्टी तो नहीं हो गयी?
पार्टी का झंडा गरीब के हाथ में वैसा ही ट्रेडिशनल लगता है जैसा कॉर्पोरेट में दीवाली के एक दिन पहले HR पर साडी ।


ऐसा नहीं है की पूरी पार्टी ही ऐसी जगह पर अपने बर्थडे की पार्टी कर रही हो, कुछ तो होंगे जो अभी भी जमीन पर चल रहे होंगे ।
बस ऐसा न हो कि अंत्योदय के लिए निकले और कैफे से काफी मय होकर लौट आए ।

अटल जी ने जो अँधेरा छटने की बात की थी वह LED बल्ब से छट चुका है और कमल भी कमाल का खिला है ।
बस अब कमल और कमलासना को बस्ती बस्ती ,देहरी देहरी पहुँचाना आपका काम है । देखिये कमलासना बरिसताओं में न सिमट जाए ।
कॉफी हो गया शायद । पार्टी के बैरिस्टर लोग इसे बैर भाव से न लें ।
बैरन सत्ता बैर ला ही देती है और इस पार्टी के इतने लोगों से इतने बैर हैं की बैरिस्टरों से भर गयी है पार्टी ।
बैरिस्टर लोगों का काम ही बैर के स्तर को बनाये रखने का होता है । और पार्टी के कुछ बैरिस्टर जनता से बैर कर बैठे हैं ,और अंत्योदय के दूसरे छोर पर नज़र आते हैं ।

इस बैर को यहीं दबा देना होगा वरना ऐसा न हो दो चार उम्मीवारों को जनता बैरंग लौटा दे । अंत्योदय के दोनों छोरों को संतुलित रखने के लिए शुभकामनाये ।

आशा है जब बरिस्ता में बैठकर बैरिस्टर लोग देश के उत्थान की बात करेंगे , तब गरीबों के लिए काफी बात होगी ।

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