इसे आप रोशनी नही है का दूसरा भाग भी कह सकते हैं | जिसने अभी तक वो कहानी ना पढ़ी हो तो यहाँ पढ़े -
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रोशनी के जाने के बाद पायल के जीवन में वही हुआ जो होता है, या जिसकी अपेक्षा की जा सकती है । अँधेरा छा गया ।
और पायल ने भी वही किया जो अँधेरे में लोग करते हैं, कभी मोमबत्ती जलाई तो कभी दिया ।
मतलब अस्थाई रूप से कई लड़कियों को काम पर रखा लेकिन कोई ज्यादा जमी नहीं या ज्यादा टिकी नहीं ।
बीच में बगल की सोसाइटी में खबर उडी कि कुछ एजेंसियों के माध्यम से बांग्लादेशी नौकरानियों ने आतंक मचा रखा है,
और किसी घटना के कारण सोसाइटी में दंगा मचा दिया ।
पहले तो नौकरानी मिलना कठिन था, कोई मिल जाये तो उसके हिसाब से एडजस्ट होने में समय लगता है ।
और जब तक उसके हिसाब से घर वाले एडजस्ट होते हैं तब तक उसका कॉन्ट्रैक्ट पूरा हो जाता है । ऊपर से ये नया बवाल , बांग्लादेशी ।
किसी के माथे पर तो लिखा नहीं है की वो देशी है या बांग्लादेशी । आधार लेकर तो सब आ जाते हैं । कुल मिलाकर अंधेर मचा है ।
पहले पता नहीं कैसे रामु काका, और रामलाल जैसे नौकर मिल जाते थे । कहने की बात नहीं है लेकिन ठाकुर का रामलाल जो काम करता था,
उसपर लोगों को बहुत शक है अभी तक । ऐसी स्वामिभक्ति बिरली ही होती है । सोचो अगर रामलाल एक दिन नागा कर जाये तो ठाकुर का क्या हो ।
खैर छोड़िये ।
तो पायल को कोई ऐसी नौकरानी चाहिए थी, जिसके हिसाब से उसका परिवार एडजस्ट हो जाये। नौकरानियों से एडजस्ट हो जाने की अपेक्षा करना महापाप है ।
पायल छठ के व्रत के दुसरे दिन चोरी से खाने का पाप तो कर सकती है लेकिन नौकरानी से उम्मीद पालने का पाप नहीं कर सकती ।
बस ऐसे ही एक बार एजेंसी ने अस्थायी तौर पर एक नौकरानी भेजी ।
पायल ने पुछा - क्या नाम है ?
उसने कहा - पंखुरी ।
पायल - वाह क्या नाम है । एकदम अनोखा ।
अच्छा बताओ क्या क्या बना लेती हो?
पंखुरी - सब बना लेते हैं ।
पायल - रोटी बनानी आती है न?
पंखुरी - हाँ , बिल्कुल गोल ।
पायल - पहले कितने घरों में काम किया है ?
पंखुरी - बहुत , घरों में । चालीस पचास ।
पायल चौंकी की इतने घर में, अगर चालीस साल की भी हो तो इतनी जगह नौकरी कैसे बदल सकती है?
पूछा - इतने सारे घर में? पिछले वाले घर में क्या करती थी?
पंखुरी -बहुत घरों में करती थी। पिछले वाले में तो बच्चे देखती थी ।
पायल को लगा चलो बच्चे ही देख ले बड़ी बात है । इसी बीच पंखुरी की चाय बन के आ गयी । चाय के स्वाद ने प्रश्नो पर विराम लगा दिया ।
बात आई गयी हो गयी।
दो दिन बाद पायल के भाई स्वामी का घर आना हुआ ।
स्वामी से पायल ने पुछा - चाय या कॉफ़ी?
स्वामी ने बोला चाय ।
पायल - नहीं तू कॉफ़ी पी ले ।
स्वामी - नहीं , चाय ही पीने का मन है ।
पायल - तू कॉफ़ी पी न । मैं अच्छी कॉफी बनाती हूँ ।
स्वामी - नहीं चाय ही बना दो । कॉफ़ी मुझे पसंद नहीं है ।
पायल - रुक न कॉफ़ी बनाती हूँ ।
स्वामी - पिलाना है तो चाय ही पिलाओ ।
स्वामी को कुछ बात के लिए मना करो तो और ज्यादा उतावला होकर वही मांगता है ।
और नौकरी ने पायल को ऐसा बना दिया है कि जब तक असंभव न हो तब तक असलियत बताये बिना जितना हो सके काम बना देने की आदत लग गयी है ।
लेकिन यहाँ नहीं चलने वाली थी । तब स्वीकारोक्ति आई |
पायल - चायपत्ती नहीं है ।
स्वामी - तो चाय का पूछा ही क्यों?
पायल -मुझे लगा तू मान जायेगा । और दोनों हंस पड़े ।
स्वामी - क्या हुआ, ऐसा होता तो नहीं था । कुछ नया काण्ड हुआ है क्या, नौकरानी नहीं दिख रही?
पायल - पूछो मत , सुबह ही उसे एजेंसी छोड़ कर आई हूँ ।
स्वामी - क्या हुआ , बड़ी दिलचस्प कहानी हुई है इस बार जरा समझाओ ।
पायल ने सुनाना शुरू किया ।
पंखुरी दरअसल उसका नाम पंखुरी नहीं था ,क्या था यह इस समय महत्त्व नही है |
पहले दिन आई तो रात हो चुकी थी, खाना हो चुका था तो सब सो गए ।
सुबह हम सब उठे तो सोचा चलो पंखुरी ने सफाई कर के चाय तो बना ही दी होगी ।
कमरे से बाहर गए तो पंखुरी सो रही थी ।
पायल ने सोच कोई बात नहीं थकी होगी सोने दो । पायल ने चाय बनाई । किचन की खटरपटर से भी उसकी नींद नहीं खुली ।
आठ बजे, बच्ची को स्कूल भेजकर, पायल ने उसे चाय नाश्ता देते हुए जगाया । उठ जाओ ! थोडा काम कर लो । पंखुरी ने चाय पी और सफाई करने लगी ।
पायल ने कहा कि एक काम करो आलू शिमलामिर्च की सब्जी बना लो । और तीन रोटी बना लेना मेरे लिए । बाकी अपने लिए ।
पायल काम कर रही थी | किचन के आवाज़ आई दीदी, आटा बच गया है तो
उसका क्या करूँ?
पायल - आटा बचता है तो फ्रिज मे रख देते हैं |
पंखुरी - अच्छा |
दोपहर में पायल खाने बैठी तो , सब्जी बड़ी बेस्वाद लगी । जैसे तैसे खाना खाया ।
पंखुरी से बोला ये सब्जी फिर कभी मत बनाना । और अपने कमरे में चली गयी ।
पंखुरी थोड़ी देर में वापस आई और बोली, दीदी सब्जी बन गयी ।
पायल का दिमाग ठनका, पुछा -कौन सी सब्जी बन गयी?
पंखुरी - आलू शिमलामिर्च ।
पायल - अरे मैंने मना किया था वो सब्जी कभी मत बनाना । फिर क्यों बनाई ?
पंखुरी - आपको पसंद नही आई ना इसलिए दोबारा बनाई |
पायल - सब्जी कभी मत बनाना |
पंखुरी चली गयी ।
थोड़ी देर में आई - दीदी अब क्या करूँ ?
पायल - सब काम हो गया? सफाई, बर्तन, कपडे?
पंखुरी - हाँ हो गए ।
पायल - जाओ फिर आराम करो ।
चार बज चुके थे , तो पायल को चाय की तलब ए ख़ास होनी लाज़मी थी ।
पायल ने आवाज़ लगाई - पंखुरी चाय ।
साढ़े चार तक चाय की खुशबु आई न बर्तनों की आहट ।
तो पायल ने जाके देखा , पंखुरी तो हॉल में आराम से सोये पड़ी थी ।
पायल ने खुद ही चाय बनानी शुरू की,
इतने में पंखुरी उठी और पायल की तरफ ऐसे देखा जैसे कह रही हो एक कप हमें भी बना दो ।
पायल ने सोचा चलो छोडो ।
पायल ने चाय बनाई | उसे लगा जैसे नौकरानी वो खुद है , और मालकिन अभी सो के उठी हैं |
शाम को पंखुरी किचन में थी और पायल काम निपटा कर चाय की आशा से कमरे से निकली , पूछा - पंखुरी क्या बनना रही हो?
पंखुरी - आलू शिमलामिर्च ।
पायल का दिमाग आलू और जबान मिर्च हो गयी, शिमला केवल नाम की बची थी वो भी सांसो मे |
बोली - तुम्हे समझ नहीं आ रहा, सुबह ही मना किया था की आलू शिमलामिर्च नहीं बनानी है ।
मत बनाओ हमारा खाना ।
पायल ने सोचा आज के लिए बहुत हो गया । बहार से खाना मंगवाया गया और सन्नाटे में खाया गया ।
दीप भी क्या करते दिन भर के काण्ड उन्हें पता तो थे नहीं ।
सोते समय पायल ने पंखुरी को समझाया देखो, आलू शिमलामिर्च की सब्जी मत बनाना हमको पसंद नहीं है । और सोने से पहले सारे पैरदान-
फटकार के साफ़ करके रख देना ताकि सुबह फटाफट सफाई कर सको । और
सुबह जल्दी उठ जाना ।
इतना समझा के पायल सोने चली गयी और पंखुरी पैरदान साफ़ करने लगी ।
रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे । पायल दीप को दिनभर की कहानी सुना रही थी । दीप ने कहा -पायल ,किचन से आवाज़ आ रही है , देखो ।
पायल उठी तो देखा पंखुरी कुछ बना रही थी ।
पायल ने पूछा क्या बना रही हो ?
पंखुरी - आलू शिमलामिर्च ।
दिन में आज चौथी बार आलू शिमलामिर्च बन रही थी, इतनी सब्जी का क्या हुआ अभी तक यह रहस्य खुलना बाकी था ।
लेकिन पायल के दिमाग में केवल आलू बचा था । दीप ने पायल को पकड़ा ... नहीं... नहीं ... मारना मत उसे ! कण्ट्रोल ! कण्ट्रोल !
और बिना कुछ कहे, घसीट कर उसे कमरे मे ले गये | दिमाग गरम हो तो नींद भी कहाँ आती है ।
पायल ने शिकायत , क्रोध और आतंकित स्वर के मिश्रित भाव मे बोला ... ये चौथी बार आलू शिमलामिर्च बना रही है आज |
इसके दिमाग़ मे आलू भरा है क्या?
दीप ने पूछा - लेकिन ये इतनी शिमलामिर्च लाती कहाँ से है ?
पायल - तुम्ही ला के रखते हो | खाओ |
सुबह हुई । और जैसी उम्मीद थी पंखुरी सो रही थी । पायल ने आज उसे उठा ही दिया ।
पायल - चार पराठे बना दो टिफिन के लिए ।
पंखुरी - दीदी आटा खत्म हो गया ।
पायल - अरे परसों ही तो दस किलो का पैकेट खोला था । एक दिन में कैसे खत्म हो गया ?
पायल ने जाके देखा आटे का डब्बा वास्तव में खाली था ।
पायल - आटा कहाँ गया?
पंखुरी-कल रोटी बनाई ।
पायल ने रोटी का डब्बा देखा तो भरा पड़ा था । फ्रिज में पांच किलो आटा गूंथा हुआ रखा था ।
पायल ने सौ डिग्री पे पहुँचते हुए पूछा ये क्या किया है?
पंखुरी बोली .. सुबह तीस रोटी बनाई, आटा बचा तो फ्रिज में रखा ।
फिर दोपहर को तीस रोटी बनाई , आटा बचा तो फ्रिज में रख दिया ।
फिर रात को तीस रोटी बनाई और आटा बचा तो फ्रिज में रख दिया ।
पायल - मैंने तीन रोटी बनाने कहा था, तीन । एक - दो- तीन । और बचा आटा फ्रिज में रखने कहा था । सारा आटा गूंथने को नहीं ।
और दूसरी बार तुम्हे रोटी बनानी भी थी तो पुराना आटा फ्रिज से निकाल लेती । सारा आटा ख़राब करने की क्या जरूरत थी ।
पंखुरी - आपने निकालने को तो कहा ही नहीं था ।
पायल- और चार बार जो सब्जी बनायीं उसका क्या किया?
पंखुरी - वो तो डस्टबिन में दाल दी ।
पायल समझ गयी । इससे नहीं बनने वाली ।
बोली अब सब्जी "मत" बनाना । रोटी भी मत बनाना ।
चावल बस बना लो वो भी बस डेढ़ कटोरी ।
पंखुरी पैरदान झाड़ने लग गयी ।
पायल ने कहा की रात को झाडे थे न , फिर क्यों झाड़ रही हो?
पंखुरी - गंदे हो गए होंगे ।
पायल - रात में कौन आयेगा इन्हें गंदा करने ।
लेकिन और कुछ कहना दीवार पे सर पटकना था सो रह गयी और अपने काम पे लग गयी ।
दोपहर में पायल एक दम चौंकी , पता नहीं क्या ख़याल आया । किचन में जाके कुकर देखा तो पांच किलो का कुकर भरा पड़ा था चावल से ।
एकदम चिल्ला कर बोली ... इतना चावल क्यों बना लिया ?
पंखुरी - नहीं दीदी , और भी है न । और बड़े भगोने में चावल भरे हुए दिखा दिए ।
पायल - मैंने डेढ़ कटोरी चावल बोला था ,न डेढ़। एक और आधा - डेढ़ ।
पंखुरी - उतना ही तो बनाया है दीदी ।
पायल का दिमाग खत्म हो चुका था। समझ नहीं आ रहा था कि हंसे की रोये ।
बोली तुमने हमको हब्शी समझ है? या बकासुर ? जो इतना खाना खा जायेंगे ।
पंखुरी एक अजीब तरह से मुस्कुरा कर रह गयी और पायल बस खुद को कंट्रोल ही कर रही थी ।
पायल ने सोच लिया था इसको निकाल देगी ।
लेकिन उसकी कहानी जाने बिना नहीं । ये मानसिक रूप से विक्षिप्त है । सोचा शाम को ही इससे बात करेगी और अपने काम में लग गयी ।
कुछ देर में किसी ने घंटी बजायी । पायल ने आवाज़ लगाई पंखुरी देख कौन है ।
पंखुरी ने लकड़ी का दरवाज़ा खोला , देखा चार लोग खड़े हैं और बिना कुछ पूछे-कहे चली गयी ।
कुछ देर कोई हलचल न देख कर पायल ने पुछा पंखुरी कौन है ?
वो बोली कोई बहुत से लोग हैं ।
पायल - नाम पूछा कौन हैं ?
पंखुरी - नहीं ।
पायल - पूछ के आओ |
पंखुरी दरवाज़े पे जाके बोली - कौन?
जवाब मिला - हम पड़ोस में रहते है, पायल से मिलने आए हैं ।
सुनकर पंखुरी चली गयी और अपने काम में लग गयी ।
थोड़ी देर में पायल को लगा अभी तक पूछा नहीं ? बोली - पंखुरी पूछा कौन है?
पंखुरी - हाँ दीदी , पड़ोस के लोग हैं, आपसे मिलने आये हैं ।
पायल - हे भगवान्। तो मुझे बताएगा कौन ?
और खुद ही दरवाज़ा खोलने में भलाई समझी ।
इस बार क्या बला उठा लायी थी पायल ।
खुद ही नहीं समझ पा रही थी ।
शाम हुई, पंखुरी को बुलाया गया।
पायल ने बड़े प्यार से पुछा - तुमको कोई दिक्कत है?
पंखुरी - नहीं ।
पायल - अनपढ़ हो?
पंखुरी - नहीं ।
पायल - हिंदी समझ तो आती है न?
पंखुरी - हाँ ।
पायल - तो खाने को लेकर ऐसा क्यों किया?
पंखुरी - दीदी मैं तो अच्छे से करती हूँ । किसी को पसंद नहीं आता | पिछली वाली दीदी को भी सब्जी अच्छी नही लगती थी |
पायल समझ गयी थी की क्यों यह 40-50 घरों में काम कर चुकी थी ।
पायल - पिछले घर में क्या क्या काम करती थी?
पंखुरी- बच्चे देखती थी ।
पायल - तो बच्चे को नहलाती धुलाती थी?
पंखुरी - नहीं वो तो उनकी माँ करती थी ।
पायल - तो तुम खाना खिलाती थी?
पंखुरी - नहीं वो तो उनकी माँ करती थी ।
पायल - तो तुम उनको घुमाती, खिलाती थी?
पंखुरी - नहीं वो तो उनकी माँ करती थी ।
पायल - पंखुरी ! तो तुम क्या करती थी?
पंखुरी - बच्चे देखती थी । मैं देखती थी ।
पायल - मतलब एक तरफ बैठके देखती थी?
पंखुरी- हाँ , वो खेलते थे ।
पंखुरी - दीदी एक बात कहें?
पायल - बोलो |
पंखुरी - मेरा नाम , बांसुरी है । पंखुरी नहीं ।
पायल - तो दो दिन से क्यों नहीं बताया ?
पंखुरी- सोचा आपको बुरा लगेगा ।
पायल - सच बताओ तुम्हारे परिवार में कौन कौन है?
पंखुरी - भैया हैं , भाभी हैं और दो बच्चे हैं ।
पायल - भैया भाभी के बच्चे हैं ?
पंखुरी - नहीं मेरे बच्चे हैं ।काम करते हैं ।
पायल - तुम कह क्या रही हो,तुम्हे पता भी है? तुम्हारी शादी हो गयी? कहाँ रहते है बच्चे तुम्हारे?
पंखुरी - शादी पहले हुई थी । दो बच्चे हैं , दोनों काम करते हैं ।
पायल समझ गयी थी की यह बीमार है । इससे कुछ भी कहना ठीक नहीं है ।
या तो उसके जीवन में कुछ ऐसा घटित हुआ है जिसके सदमे से वो अभी तक उबर नही पायी
या उसे कोई मानसिक बीमारी है ।
उसे वापस एजेंसी छोड़ने का फैसला तो पायल कर चुकी थी ।
और सुबह ही उसे छोड़ भी आई थी ।
लेकिन उस महिला की वास्तविक कहानी शायद कभी पता नहीं चल पायेगी ।
पायल ने बात ख़तम करते हुए स्वामी से कहा अब समझ आया ? क्या हुआ था ?
स्वामी - अच्छा | चलो ये तो ठीक है की उसे वापस भेज आईं | लेकिन ये बताओ उसे लाइन क्यूँ थी ? पिछली वाली का क्या हुआ जो तीन महीने से थी?
पायल - उसने मेरे घर मे सावधान इंडिया बना दिया |
स्वामी - क्या? इससे पहले मेरा मन किसी ग़लत आदमी पे शक करे, बता ही दो |
पायल - शुक्रवार को रात को तीन बजे तक, मेरे घर पे पुलिस बैठी थी |
स्वामी - क्यों?
पायल - गुरुवार की बात है |
पायल कपड़े धो कर आई , तो पीठ मे स्ट्रेन हो गया, और गिर पड़ी और न उठ सकी न चीख सकी |
बस रोने लगी |
नौकरानी ने दीप को फोन लगा दिया , दीदी गिर गयी हैं | और बहुत रो रही हैं | जल्दी आ जाओ |
वो अपना काम छोड़ कर निकल गये |
थोड़ी देर मे मुझे आराम लगा और मैं बेहतर महसूस करने लगी | इतने मे उसने फिर फोन कर दिया -
और न जाने क्या कह दिया |
दीप शायद लिफ्ट मे ही थे, फ़ोन काट के बुरी तरह घबराए से दौड़ते हुए घर मे आए |
पायल को बैठा देखकर थोड़े शांत हुए , लेकिन भभक पड़े | ऐसे कौन बोलता है | उनका गुस्सा चौबीसवे माले पे था |
पायल - आख़िर क्या बोला इसने ?
दीप - इसने बोला - भैया , दीदी शांत हो गयीं है | मैं क्या समझता बोलो |
नौकरानी को समझाया गया देखो ऐसे नही बोलते हैं | इसका मतलब अलग होता है |
बात ख़तम हुई |
स्वामी - लेकिन इसमे सावधान इंडिया कहाँ से आया |
पायल - वो कभी और सही | बस इतना समझ लो कि इस बार बड़ा कांड होते हुए बचा है | नौकरानी ने छत पे से प्लमबर को घर मे बुलाया था | और..
स्वामी - और...बस रहने दो , अकेले मे दोनो कीर्तन तो कर नही रहे होंगे |
पायल - हाँ ! बस - रात को दोनो को पुलिस के हवाले किया है | बड़ा कांड बचा है घर मे | लेकिन डर लगने लगा है | सुरक्षा कहीं नही है, और नौकरानियों से तो बहुत डर गयी हूँ |
एक तरफ मजबूरी है , जो जीने नही देती और बीमारी मे भी काम करने को मजबूर करती है | पंखुरी की कहानी बहुत उलझी हुई है | और ये दूसरी वाली, इसने तो खुद ही कुएँ मे कूदने की सोच ली है |
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