शनिवार, 17 जून 2023

सब राम जी की इच्छा है

ईश्वर स्वामी, सखा, परिजन, आराध्य, प्रेमी, बालक कुछ भी हो सकते है। जो जिस रूप में देखना चाहे ईश्वर उसके लिए वैसा ही बनकर सामने आ जाते है। जिसने स्वामी के रूप में चाहा तो वे स्वामी बन गए जिसने शत्रु के रूप में चाहा तो वे शत्रु बन गए।

ईश्वर ने कभी यह नहीं कहा कि मेरी पूजा नहीं की तो नर्क भोगोगे, या मेरे आलावा किसी और की पूजा की तो मार दिए जाओगे। हमारे ईश्वर ने हमें चुनने के लिए स्वतंत्र छोड़ा है। जब जिसके भाग्य उदय होते हैं, उसकी मति उससे ऐसे कर्म करवा देती है कि वह स्वयं ईश्वर में लीन हो जाता है।  

कितने ही नास्तिक आस्तिक हो जाते हैं। उन्हें कोई धमकाता नहीं है, न ही किसी लोभ के चलते वे इस करते हैं। न ही कोई जबरदस्ती ईश्वर की आराधना करने को कहता है। नास्तिक होना भी अपने आप में सनातन का एक पथ है जिसपर जो चाहे चल सकता है।  

ईश्वर से हमारा सम्बन्ध परिजन सा ही है, गाँवों में आज भी ग्राम देवता को बाबा या दादा कहते हैं। कुलदेवी मैया ही हैं। कृष्ण  को ठाकुर जी कहकर उन्हें कोई स्वामी कहता है कोई बालगोपाल स्वरुप में ह्रदय से लगाए घूमता है। परन्तु अपने आराध्य की मर्यादा कोई नहीं लांघता। अनजाने में की गई भूल ईश्वर भी क्षमा कर देते हैं।

हमारा ईश्वर बात बात पर दंड देने वाला दंडाधिकारी नहीं है, जो धमकाकर अपनी पूजा करवाता हो।

लोक परम्पराओं में ईश्वर का जिस भी रूप में वर्णन किया गया सब स्वीकार्य रहा। हास्य प्रधान लोकगीत भी प्रचलित रहे और नाट्य भी। हमारे आराध्य केवल कल्पना मात्र नहीं रहे वे हमारा इतिहास हैं।

लोग कथाओं को कई तरह से सुनते सुनाते आए हैं, लोकगीतों में लोककथाओं में नए आयाम देकर कथा को बढ़ाते आए हैं, लेकिन महिमा  और महत्त्व को बनाए रखा है। बहुत लोगों ने ऐसी कल्पनाएं की हैं कि किसी विशेष परिस्थित में अगर वे रहे होंगे तो क्या हुआ होगा। उनके किसी चरित्र की विशेषता को उस परिस्थिति ने कैसे उजागर किया होगा। 

उदाहरण के लिए एक लोकगीत है जिसमें राम जी हनुमान जी से विवाह कर लेने के लिए कहते हैं। यह किसी किताब में नहीं होगा। लेकिन फिर भी इसमें ईश्वर की महिमा को कम करने का प्रयास नहीं किया है। 

https://youtu.be/aRBycpvjrLM

जब कृष्ण भक्त गाते हैं राधिका गोरी से बिरज की छोरी से मैया करा दे मेरो ब्याह। और उत्तर मिलता है नजर तेरी खोटी है , उमर तेरी छोटी है कैसे करा दूं तेरा ब्याह। यह किस पुस्तक, किस ग्रंथ में मिलेगा?

लेकिन सुनकर ही माता–पुत्र का जो संवाद उभरता है, वह अपने साथ बहा ले जाता है। भक्ति केवल भक्ति नहीं है, वात्सल्य है, प्रेम है, समर्पण है, भय और हास्य विनोद भी है।

पिछली बार मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर में एक दंपति सर पर भेंट लिए मंदिर में अंदर आए और ऐसे प्रसन्न हुए जैसे अपने पुत्र से मिलने आए हों। पति ने भीड़ देखकर अपनी पत्नी से कहा देखो वो हैं, भीड़ में हम उनको दिखेंगे नहीं इसीलिए हाथ दिखाओ उनको। और दोनों हाथ ऊपर करके ऐसे प्रभु ध्यान का ध्यान "इधर! इधर !यहां" चिल्लाकर अपनी ओर खींचने का प्रयास करने लगे जैसे आप किसी भीड़ के बीच में किसी अपने का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर सकते हैं। वह भाव तो तभी जागृत हो सकता है जब भक्ति और श्रद्धा अपार हो। कृष्ण जब केवल मंदिर में बैठे आराध्य नहीं बल्कि अपना ही कोई परिजन लगने लगे तब किसी का इस प्रकार का व्यवहार अचंभित नहीं करता। 

नवरात्र में बुंदेलखंड में कौन सा मंदिर होगा जहां – झूम छननन बाजे माई पांव पैंजनिया न बजता हो। हमारी देवी त्यौहार में आती हैं तो उनकी कल्पना भी प्रसन्नता के साथ नाचते झूमते हुए आने की कल्पना की जाती है। 

"माई हंसा चाल मृग नैन, दुलारी तोरे भुवन कहां" आज भी जो सुनता है उसके मन में श्रद्धा भर जाती है।

किसी ग्रंथ में ऐसा लिखा तो नहीं होगा, किसी न किसी की कल्पना ही होगी।

मूल बात है कि रचने वाले में श्रद्धा कितनी है और नीयत कैसी है। ईश्वर की इच्छा के बिना ग्रंथ तो क्या एक शब्द लिखने का सामर्थ्य किसी में नहीं है, फिर भी अगर किसी पर कृपा हो ही गई है तो भाषा की मर्यादा रखना उसके अपने हाथ में हैं। भाषा बिगाड़ने से ईश्वर का कुछ नहीं बिगड़ता, लिखने वाले का चरित्र पता चलता है।

आज बहती धारा में सब कुछ न कुछ लिख रहे हैं, कुछ अच्छा भी लिख रहे हैं और कुछ कथाओं का आधुनिकीकरण भी कर रहे हैं। 

 लोग केवल व्यवसाय की दृष्टि से कथा कहने सुनने लगेंगे तो कथाएं अपना मूल खो देंगी। 

कुछ लोग आलोचनात्मक दृष्टि से भी परिभाषित कर सकते हैं और कुछ अपनी विकृत सोच में कथाओं को ढाल सकते हैं। 

कथा को संभवतः समय के साथ पुनर्परिभाषित करना चलता रहेगा और चलता रहना चाहिए। समय के साथ कई चीजों को देखने का दृष्टिकोण बदलता रहता है। कल जो चमत्कार था आज नहीं है, आज जो चमत्कार हैं वो शायद कल चमत्कार न रहे। ऐसे में उन लोगों का लिखना आवश्यक है जो श्रद्धा रखते हैं, अन्यथा अगर श्रद्धा न रखने वाले व्यवसायी लिखेंगे तो वे उसे केवल वायरल होने की कसौटी पर रखकर लिखेंगे।

फिर रामकथा जैसी कथावस्तु, जो अपने मूल रूप में ही पूर्ण है उसे फिर से कहने के लिए ईश्वर की अपार कृपा चाहिए। कसौटी यह है कि अगर कोई राम कथा कह रहा है और हर घटना पर भावनाओं का ज्वार न उठे तो वह कहने में असफल है। अगर धनुष भंग के प्रसंग से उमंग न जागे तो वह दृश्य असफल है, अगर स्वयंवर में वरमाला के दृश्य के समय किसी भी पुत्री के पिता की आंखें न भर आएं तो वह दृश्य असफल है, अगर राम के वनवास के समय गले न रूंध जाएं, भरत मिलाप के समय भाई की याद न आ जाए तो कथा कहने वाला असफल है, सीता हरण के समय स्वयं जटायु हो जाने का मन न करने लगे तो कथा कहने वाले में कमी रह गई है। लंका दहन में हनुमान जी के प्रति श्रद्धा से हाथ न जुड़ें तो कथा क्या ही कही गई है, और रावण के वध के बाद भी कथा सुनते रहने की इच्छा न बची रह जाए तो कथा कहने वाला असफल है।

अतः जो कथा जन जन के मन में बसी है, फिर भी उसी को सुनने देखने के लिए लोग हर वर्ष रामलीला में पहुंच जाते हैं उस कथा को कहने के लिए बहुत मेहनत और श्रद्धा की आवश्यकता है। वह कथा कहने के पहले और बाद में लेश मात्र भी अहम उत्पन्न हो गया तो सब पानी में गया समझिए। घटनाओं की गलतियां लोग नजरंदाज कर देते हैं लेकिन जब संवाद ईश्वर के हों तो आशा होती है कि हर संवाद से प्रेरणा और शक्ति ही प्राप्त होगी। उसी के लिए लोग रामकथा सुनते हैं। फिर मौका मिलने पर भी कोई ठीक से न सुना पाए तो समझिए राम जी की इच्छा है।

गुरुवार, 8 जून 2023

टिपिकल मसाला

वैसे तो इस लेख में तर्क वगैरह को स्वाहा ही समझिये। फिर भी अगर बिना किसी तर्क के ही पढ़ सकें तो पढ़ें। एक नई फिल्म के टीज़र देखने के बाद, हमनें सोचा अगर पुराने जमाने के टिपिकल मसाला फिल्मों वाले इस फिल्म के डायलॉग लिखते तो कैसे लिखते। डायलॉग और सीन कैसे होते?

कहीं दूर किसी टापू पर, किसी किले के सामने  –

"रावण अली! चुपचाप अपने दोनों हाथ ऊपर कर के बाहर आ जाओ। वानरों ने तुम्हें चारों तरफ से घेर लिया है।"

"तुमने अभी रावण का कहर देखा नहीं है सूर्यवंशी। रावण के खौफ से देवता भी थर थर कांपते हैं।"

पृष्ठभूमि में संगीत ~ लंक..लंक..ल..ल ...लंकेश ..लंकेश।

"रावण जब स्वर्ग की तरफ देख भी लेता है तो देवता कहते हैं अप्सराओं छुप जाओ नहीं तो रावण आ जाएगा।"

"ये गीदड़ भभकी किसी और को देना रावण। माँ का दूध पिया है तो बाहर निकल। क्या कायरों की तरह छुप कर बैठा है।"

"लौट जाओ सूर्यवंशी, वरना.."

"वरना क्या रावण अली.."

"अंजाम बहुत बुरा होगा!"

पृष्ठभूमि में संगीत ~ लंक..लंक..ल..ल ...लंकेश ..लंकेश।

"अंजाम की धमकी किसी और को देना। मैं अपने सर पर कफ़न बांध के आया हूं और आज मामला रफा दफा कर के ही जाऊंगा। "

"सूर्यवंशी भूलो मत तुम असुर बस्ती में खड़े हो, ये हमारा इलाका है।  हमारे इलाके में घुसकर हमें भड़काओ मत।"

"इलाके कुत्तों के होते हैं, शेर जंगल का राजा होता है और तुम्हारे सामने शेरों की सेना खड़ी है। "

सीन का फोकस अचानक अदालत में - 

"ऑब्जेक्शन मीलॉर्ड ! मीलॉर्ड, मेरे काबिल दोस्त फेक न्यूज़ फैला रहे हैं। साफ़ साफ़ दिख रहा है सामने वानरों की सेना है।"

"ओवर रूल, आप ऐसे वनरों को शेर बता कर फैक्ट के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकते।"

"लेकिन मीलॉर्ड .. "

हथौड़े की आवाज़ ठक्क !

सीन का फोकस वापस किले पर  - 

 उधर से मेघनाद – "भूलो मत हमारे कब्जे में कौन है। चुपचाप हथियार डाल दो। वरना हमारे हथियार उठे तो बहुत खून बहेगा। क्यों खुद अपनी तबाही को बुला रहे हो।"

"मेघनाद, क्लाइमैक्स में फैमिली का अपहरण आउटडेटेड हो गया है। हमने तुम्हारे हथियारों का फ्यूज कंडक्टर हमने पहले ही निकाल लिया था। हार मान लो और दशहरे पर जलने के लिए तैयार हो जाओ।"

संगीत - ढेंटें  sss ढेंटें ....

भारी आवाज में डायलॉग ... मुद्दई लाख बुरा चाहे तो .....वगैरह वगैरह।

ढेंटेँ sss ढेंटें .... टन टन्न टन टन्न

"अरे वानर तुम तो द्रविड़नाडू वाले हो, साउथ इंडियन हो। तुम क्यों इन नॉर्थ के लोगों का साथ दे रहे हो। ये यूपी वाले भैया लोग बड़े लड़ाकू होते हैं।"

"जबान को लगाम दे मेघनाद!नॉर्थ से साउथ और ईस्ट से वेस्ट इंडिया एक है।हम सब इंडियन हैं।लंका का मलिंगा हमको सिखाएगा?

तुम्हारा लंका कढ़ी में पकौड़े की तरह पड़ा हुआ द्वीप है।जितने तुम्हारे यहां की जनसंख्या है उतने तो हमारे यहां NRI विदेशों में स्वतंत्रता संग्राम की तैयारी में लगे हैं।

जितने सोने के तुम्हारे देश में सोने के महल हैं उतना सोना तो हमारे केरल वाले सऊदी से अपने *** में भरकर ले आते हैं। जितनी तुम्हारी जीडीपी है उतना तो हमारे देश को बर्बाद करने के लिए सोरोस इन्वेस्ट कर देता है।

जितने साल लंका को बने हुए नहीं हुए उससे ज्यादा तो अकेले नीतीश कुमार  बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। हमारा देश एक भारत और श्रेष्ठ भारत है। और इसीलिए चुपचाप हथियार डाल दो।"

"तुम क्या हथियार डलवाओगे, हमारी तो एक नजर  ही काफी है कहर बरपाने के लिए। याद है तो १७०० करोड़ का पुल। उसे हमारी ही नजर लगी थी। इसीलिए बनने से पहले ढह गया।"

"पुल तो हम और बना लेंगे। देख लो तुम्हारे ही सामने समुद्र पर पुल बनाकर हम नदी के इस पार इतनी बड़ी सेना लेकर आ गए।"

सीन कट कर अचानक अदालत में-

"ऑब्जेक्शन मीलोर्ड।नदी नहीं समुद्र।मेरे काबिल दोस्त भूल गए कि पुल समुद्र पर बना है।"

"सस्टेन्ड!" जोर से हथौड़े की आवाज़।

सीन वापस युद्ध भूमि में।

"तुम्हारे जैसे राक्षसों की बुरी नजर हमारे राष्ट्र का कुछ नहीं बिगाड़ सकती। अरे, हमारे तो ट्रकों के पीछे भी लिखा होता है – बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला।"

"संघी, भक्त। राष्ट्रवाद फैलाता है। तुम लंका जलाने के अलावा कर क्या सकते हो। अरे सूपर्णखा तो पंचवटी में मोहब्बत की दुकान खोलने आई थी, तुम सेवक संघ वालों ने उसकी नाक काट दी और नाकपुर शहर बसा दिया। और अब उसी नाकपूर से सारी दुनिया चलाना चाहते हो। यही है तुम्हारी इंसानियत?"

"अरे मोहब्बत की दुकान वालो, दुकान खोलकर एक तरफ बैठो, घर घर जाकर क्यों जबरदस्ती बेचते हो। अपनी मोहब्बत अपने पास रखो और सरेंडर कर दो। अब भी मौका है, तुम्हे सरकारी गवाह बना देंगे और कम से कम सजा होगी!"

विभीषण हाथ ऊपर कर के बाहर निकलता है। "मैं सरेंडर करने के लिए तैयार हूं। सरकारी गवाह बनने के लिए भी।"

"देश द्रोही। कुल द्रोही। मैं तुझे नहीं छोडूंगा।"

"भैया, आप भी सरेंडर कर दो। हम अपनी सजा काटने के बाद इज्जत की जिंदगी जिएंगे। आप बाहुबली हो चुनाव लड़कर विधायक या सांसद भी बन सकते हो। और इन लोगों ने चाहा तो आपको राज्यसभा का टिकट भी दे सकते हैं।"

"अरे देश द्रोही, लंकेश हैं हम। लंका में राजसभा होती है राज्यसभा नहीं। रुक अभी तेरा टिकट कटवा कर तुझे रफा दफा करता हूं।"

पृष्ठभूमि में संगीत ~ लंक..लंक..ल..ल ...लंकेश ..लंकेश।

" इससे पहले कि मेरे वानर लंका में घुसकर तुम्हारी लंका लगा दें, बाहर आ जाओ। आखिरी मौका है।"

रावण का फोन बजता है। 

"हैलो!"

"हैल्लो सर, गुड मोर्निंग। मैं बजाज फाइनेंस से बोल रहा हूँ। "

"सर सुना था कोई लंका जला गया था, रिकंस्ट्रक्शन वगैरह के लिए हमारी कंपनी आपको प्री-एप्रूव्ड होम लोन दे रही है।"

"नहीं चाहिए।"

"कोई और लोन की जरूरत हो तो बताइये सर।"

"नहीं चाहिए।" 

"पुष्पक विमान का इंस्युरेन्स करवा लीजिये सर। "

"नहीं करवाना।"

"आप युद्ध में जा रहे हैं सर अपना बीमा करवा लीजिये। हेल्थ कवर और बीमा के बढ़िया प्लान हैं सर।"

"नहीं चाहिए। अबकी बार फोन किया तो ब्लॉक कर देंगे।"

"याद रखना एक बार अगर हमको ब्लॉक किया तो फिर हमसे लोन लेना तो भूल ही जाओ।"

"अहंकारी हम हैं, कि तुम हो? लोन दे रहे हो या अहसान कर रहे हो? दोबारा फोन मत करना नहीं तो तुम्हारा बीमा करवा देंगे।"

और फिर सन्नाटा... युद्ध की घोषणा करते हुए आसमान में विमान।

संगीत ... नगाड़ों वाला।

लंका में - "आई लव यू ब्रो! उठ जाओ लड़ने जाना है।"

"आई लव यू टू ब्रो लेकिन लड़ने जाना ही क्यों है। प्रवक्ता और आईटी सेल वाले छुट्टी पर हैं क्या? इतना तो वो ही लड़ लेंगे।"

"लड़ तो लेंगे ब्रो लेकिन ये जंग जुबानी नहीं है।"

"लेकिन तुम्हारे लिए मैं क्यों लड़ूँ?"

"क्योंकि उनकी सेना में कोई आई लव यू नहीं बोलता ब्रो। हमारी लंका में सब एक दूसरे को आई लव यू बोलते हैं इसलिए जाओ लड़ो ब्रो। "

अब यहां के सीन किसी वेबसीरीज वाले ने लिखे हैं –

सीन कटकर बीबीसी पर – संयुक्त राष्ट्र ने लंका में बढ़ते तनाव को देखते हुए दोनों पक्षों से शांति की अपील की है। अमेरीका ने लंका को हथियार देने की पेशकश की। अमेरिका और चीन हथियार देने के लिए आपस में भिड़े।

सीन वापस लंका में – लंका से निकलता हुआ भीमकाय कुंभकर्ण।

सीन टीवी पर – आपके लिए एक्सक्लूसिव तस्वीरें। लंका की तरफ से लड़ने के लिए कुंभकर्ण निकल रहा है। भीषण लड़ाई की संभावना। केवल हमारे नंबर वन चैनल पर एक्सक्लूसिव तस्वीरें।

बीच में विज्ञापन, विज्ञापन में मेघनाद – इस युद्ध में आपने ड्रीम ११ पर सेना बनाई? सेना नहीं बनाओगे तो जीतोगे कैसे?

सीन वापस लंका में– कुंभकर्ण गिर रहा है, वानर उसकी देह के नीचे दब रहे हैं। युद्धभूमि से पुलिस और एम्बुलेंस के सायरन की आवाज।

मीडिया से युद्ध भूमि पटी हुई।मीडिया लाशों के मुंह में भी माइक ठूंस कर बाइट लेने की कोशिश करती हुई।

एक राक्षस- जब मुझसे लड़ना ही नहीं था तो बुलाया क्यों था?

मीडिया - सर आप स्वयं सक्षम है भिड़ जाइए किसी से भी।

इसी बीच लंका पक्ष की आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस – युद्ध में आज कुंभकर्ण शहीद हो गए हैं। कुछ लोग उनकी चपेट में आकर घायल हुए हैं। हम हालात पर नजर बनाए हुए हैं। घायलों को मोहल्ला क्लिनिक में भर्ती करवाया जा रहा है।

बंगला सरकार ने घायलों को दो दो लाख रुपए दो हजार की गड्डियों में बांध कर भेजे हैं।

वानर पक्ष का आधिकारिक बयान – आज अपराह्न २ बजे, एक एनकाउंटर में रावण के भाई की मृत्यु हो गई है। एनकाउंटर ऑपरेशन अभी चल रहा है जिसकी जानकारी सही समय पर उपलब्ध करवा दी जाएगी।

जेएनयू में नारेबाजी – कुंभकर्ण हम शर्मिंदा हैं।

दिल्ली में एक सभा में वक्ता की आंख में आंसू  – आज उनकी बड़ी हैंडसम याद आ रही है।

*हैंडसम आदमी की याद भी हैंडसम होती है।

जंतर मंतर पर कैंडल मार्च। जस्टिस फॉर कुंभकर्ण।

ग्रेटा का आधिकारिक ट्वीट – दिस इस क्लाइमेट इमरजेंसी।

Kumkan was an environment activist. **please use the toolkit for tweet storm at noon today.

पर्यावरण मंत्री – इस साल फिर कुंभकर्ण मर गया, बाकी भी मरते ही होंगे। इस साल भी दिवाली पर प्रतिबंध है। पटाखे बैन करो।

उधर युद्धभूमि में मुझे मजबूरन तुम्हारे अहंकार की छाती में यह ब्रह्मास्त्र गाड़ना पड़ रहा है। और फिर   ..... !!

"ये सब जान गए हैं शिवा! तुम ही ब्रह्मास्त्र हो शिवा। अहंकार की छाती में से निकल आओ शिवा। शिवा! शिवाSSS"

ट्विटर पर ट्रॉलिंग – इस देश में जब तक सनीमा है ....!