शनिवार, 7 अप्रैल 2018

बदलाव

हम वर्तमान सरकार को कुछ विशेष दृष्टि से ही देख रहे हैं । कहीं न कहीं बहुत कुछ हमारी खुद की दृष्टि को बाधित कर रहा है । हम कोई न कोई घटना , विचार, आंकड़ा , वक्तव्य या किसी व्यक्ति विशेष की आलोचना को ही इस सरकार की सफलता या असफलता का पैमाना मान कर सरकार के प्रदर्शन का मूल्यांकन कर रहे हैं ।

आज बात आंकड़ों की नहीं , न ही विरोधियों की आलोचना की , न ही किसी वक्तव्य की । कुल मिला कर हम समाज और अपने जीवन में आये बदलाव पर एक नज़र डालते हैं ।


2014 से पहले एक नैराश्य था, लोगों को कुछ ख़ास उम्मीद नहीं थी । ऊपर से दिखते शहरी विकास, और महलों के प्रकाश से लोग अचंभित थे मुग्ध थे लेकिन कोई आशा नही करता था कि जो दिल्ली के महलों में है वो उसके घर में होगा ।

बिजली को लीजिये , पहले बिजली होना एक सुविधा की तरह था जहाँ थी वहां थी, और जहाँ नहीं थी वहां के लोगों को उम्मीद नहीं थी । उत्तर प्रदेश में लोगों के मन में नैराश्य था, बिजली मिलने की आशा नहीं थी । इन्वर्टर जनरेटर के इंतेज़ाम कर लिए जाते थे बिना शिकायत के । यहाँ तक कि लोग सोचते थे बिजली आती ही नहीं है और यह सामान्य बात है ।

लेकिन अब सोच बदली है, बिजली को सुविधा से बढ़कर आवश्यकता की तरह देखा जाने लगा है । पहले जहाँ छह से बारह घंटे की कटौती सामान्य बात थी अब एक दो घंटे कटौती होने पर भी लोगों ने शिकायत करना शुरू कर दिया है । जो दर्शाता है कि लोगों ने इसे अपना आधिकार समझना शुरू कर दिया है । यह बदलाव हैं ।


सुबह सुबह कान में एक गीत पड़ता है एक गाडी "इरादा कर लिया वादा" गीत बजाते हुए निकलती है और घर घर से कचरा उठाती चली जाती है । बड़े शहरों में कुछ ऐसी ही परंपरा पहले से थी । अब यह एक आम शहर की आम बात बन गयी है । आपको नहीं लगता यह एक बड़ा बदलाव है , शहर की सफाई के प्रति बहुत बड़ा कदम है?   स्थानीय निकायों ने अपनी अपनी रफ़्तार से लागू किया है लेकिन बदलाव दिखता है ।

स्वच्छता के प्रति लोगों में जागरूकता बहुत बढी है । शहर पहले से अधिक साफ़ हैं । बाज़ारों  में शौचालय काफी तेज़ रफ़्तार से बने हैं । बड़े तो पीछे है, स्वच्छता के एम्बेसेडर बने हैं छोटे छोटे बच्चे । जब एक छोटा बच्चा ट्रेन में बैठकर बिस्किट खाने के बाद पूछता है ये रैपर कहाँ फेकना है तो समझ लीजिये स्वच्छ भारत अभियान सफल हुआ है । स्वच्छता को सरकार सहयोग कर सकती है, लेकिन गंदगी लोगों की जागरूकता ही हटा सकती है और यह मेरी समझ में बदलाव की और बड़ा कदम है ।

घर घर शौचालय बनाने की जो मुहिम चली , उसमे गाँव गाँव के घर घर तक शौचालय बनते देखे गए  । गाँवों में स्वच्छता के प्रति नज़रिये में बदलाव साफ़ दिखता है । मैंने ऐसे लोगों को शौचालय बनवाते देखा जो अस्सी नब्बे साल के हैं , लेकिन इतने सालों में अब जागरूक हुए हैं । देखिये किसी ऐसे जागरूक हुए परिवार को अपने आसपास आपको बदलाव दिखेगा  ।

अब की बार जब आप रेल से सफर करें तो थोड़ा गौर करें । क्या आपको स्टेशन साफ लगते हैं? क्या स्टेशनों पर शौचालय साफ है ?  रेलगाड़ी में सफाई की स्थिति कैसी है ? पिछली बार आपने तत्काल के प्रति हाय तौबा कब देखी थी ? अगर सर्दियों में कोहरे के अलावा किसी और कारण से बहुत लेट हो रही है ? क्या गाड़ियों का किराया इतना बढ़ गया है जितना 5 साल में नहीं बढ़़ना चाहिए?

जरा गौर कीजिए रेलगाड़ी में सफाई, सुविधा और रेलमंत्री द्वारा जरूरतमंद लोगों तक जरूरत का सामान पहुंचाना,  उनकी समस्याओं का समाधान  करना ।चलती रेलगाड़ी में आपने ऐसा होते देखा सुना है?

जब हम सड़क पर चलते हैं खासकर लंबी दूरी के लिए तब आपको कोई बदलाव महसूस होता है ?आपको नहीं लगता कि यह सफर अब अधिक सुविधाजनक हो गया है । सड़कों की स्थिति पहले से बेहतर है आपको नहीं लगता कि जो सड़कें सालों से लंबित थी, वो अचानक कब बन गई पता ही न चला ।

ऐसे ही देश में न जाने कितने हवाई अड्डे कितनी उड़ाने  शुरू हो गई धीरे धीरे , जिनकी जीवन में एक बार हवाई जहाज में बैठने की इच्छा पूरी हुई है शायद उनके लिए बड़ी बात होगी ।

ये सब होता गया और हम इसे सामान्य घटनाक्रम में लेते गए । बदलाव शायद महसूस नहीं हुआ ।

जब आप दूध लेने जाते हैं और दूध वाले को पेमेंट किसी वॉलेट के माध्यम से करते हैं तब आपको नहीं लगता कि हम काफी आगे  आ गए हैं यहां तक की छोटे शहरों में छोटे-छोटे कारीगर तक विमुद्रीकरण के  समय में Paytm अपना गए । आपको नहीं लगता की दशकों तक आम जनता को अनपढ़ और मूर्ख समझा गया और उसे आगे बढ़ने ही नहीं दिया गया और जब डिजिटल इंडिया की बात आई तब वही अनपढ़ गरीब आसानी से यूपीआई भीम वॉलेट द्वारा डिजिटल ट्रांजैक्शन महीने भर में सीख गया ।

लोग कहते रह गए अनपढ़ आदमी डिजिटल ट्रांसक्शन नहीं समझ सकता, वह कैसे कर पायेगा और  हुआ उल्टा जिस तेजी से डिजिटल ट्रांजैक्शन बढे हैं और लोगों ने सीखा है वह यह बताता है कि वर्तमान सरकार  ने लोगों पर भरोसा करके डिजिटल इंडिया को बढ़ाया और लोगों ने उस भरोसे को कायम रखा ।

जिनके पास था शायद उनको बैंक अकाउंट का महत्व नहीं पता होगा, जिनके पास नहीं था और 2014 के बाद खुला वे जानते हैं के खाते में सीधा पैसा पहुंचना उनके लिए कितना फायदेमंद है। बैंक कर्मियों ने जबरदस्त काम किया लोगों को बैंक से जोड़ने में और मिशन मोड में वह कर दिखाया जो शायद पुरानी रफ्तार से अगले 20 साल में भी ना हो पाता यह बदलाव है ।

बहुत छोटी सी चीज आई है आजकल सिम एक्टिवेट करने का तरीका देखा है आपने? बस डिजिटली वेरीफाई करो एक दिन में ही सिम एक्टिवेट हो जाती है 2 से 3 दिन लगते थे ।

पिछले 4 साल में कितने लोगों ने पासपोर्ट बनवाया या रिन्यू किया यह बता सकते हैं कि पासपोर्ट बनवाना कितना आसान हो गया है।

शायद सब्सिडी का गणित आम आदमी को समझाना बड़ा कठिन हो । क्योंकि इसका असर सीधा सीधा उसकी जेब पर पड़ता है ।

लेकिन आज वास्तव में गैस पर सब्सिडी बहुत कम हो गयी है । पहले आपको चार सौ में सिलेंडर मिलता था लेकिन सरकार को बरह सौ का पड़ता था । अब सोचिये एक सिलेंडर पर सीधा आठ सौ रूपये आपको सब्सिडी देती थी । लेकिन फिर किसी और तरह से वसूल लेती थी । आज के समय में सिलेंडर बाजार भाव से मिल रहा है । कुछ लोगों ने सब्सिडी छोड़ भी दी है । उससे फायदा हुआ कि गरीबों तक उज्जवला योजना के जरिये  गैस पहुंची । सोचिये इतने सारे सिलेंडर कनेक्शन धारी अचानक कहाँ गायब हो गए? कहीं न कहीं सब्सिडी लीक होती थी वह बंद हुई है ।
कुल मिला कर बात ये है कि सरकार का सब्सिडी का बोझ कम हुआ है । अब बारह सौ का सिलेंडर लगभग आठ सौ का सरकर को ही पड़ता है । और उसमे से कुछ सब्सिडी आपको मिल जाती है । लेकिन इसका फायदा सरकार ने गरीबो तक पहुँचाया है ।

समाज में चरित्र निर्माण की प्रक्रिया धीमी है पर दिखती है । लोग चीज़ों को बारीकी से देखते हैं । प्रश्न करते हैं । जनप्रतिनिधियों के जनता के बीच में जाने की ख़बरें भी आती हैं और सोशल मीडिया पर भी जनप्रतिनिधि संपर्क में बने रहते हैं । यह बदलाव है ।

हाँ यह बात अलग है कि कुछ स्थानीय सरकारों ने काम को तेज़ी से बढ़ाया है और कुछ सुस्त पड़ी रही ।कुछ विरोध के नाम पर हरकत में ही नहीं आयीं । जिससे अलग अलग जगहों पर अलग अलग रफ़्तार दिखती है ।

दुकानदार अब खुद आपको रोककर बिल देते है । अधिकतर मेडिकल स्टोर वाले बिल स्वतः देते हैं । दवाइयाँ सस्ती हुई हैं । जहाँ जहाँ नहीं हुआ है, वहां समय के साथ होगा ।

सेना का मनोबल इस समय बहुत ऊँचा है । हमले होते हैं, लेकिन सेना उत्तर दुगनी शक्ति से देती है ।

देश के सम्मानों को देख लीजिये, पिछले सालों में पद्मभूषण, पद्मविभूषण सेलेब्रिटी लोगों से ज्यादा आम लोगों को मिल रहे हैं । जिन्होंने वास्तव में जान सेवा की है । यह सराहनीय है ।

बीमा योजनाएँ और स्वास्थ्य की ओर सरकार के कुछ अच्छे कदम हैं | हमारे यहाँ अब तक स्वास्थ्य सेवा को एक सुविधा की तरह देखा गया है | अस्पताल होना एक आवश्यकता नही एक विशेष सुविधा मानी जाती है | अब हेल्थकेयर के माध्यम से शायद हमारी दृष्टि यहाँ बदलेगी | अब स्वास्थ्य सेवाएँ सुविधा नही अधिकार बनने जा रही हैं | अगर नमोकेयर सफल होता है तो हमारे समाज का खाका बदल जाएगा | जहाँ आज काई परिवार अपनी समस्त जमापूंजी किसी एक बीमार सदस्य पर खर्च कर देते हैं इस सुविधा से लोगों को बहुत राहत मिलेगी | और सरकार ने अस्पतालों को सुविधा नही आवश्यकता की तरह बनाने का प्रयास किया है | नये एम्स और मेडिकल कॉलेज इसकी पुष्टि करते हैं |

आजकल आपने गौर किया हो तो ख़बरे आती हैं कि बहुत बड़ा आंदोलन हो रहा है , इतने हज़ार लोग चलकर राजधानियों मे पहुँच रहे हैं | लेकिन अगर लोग बिना उत्पात के सरकार के साथ सहयोग करते रहे हैं तो बड़े बड़े आंदोलन शांति से निपट गये हैं | उनको छोड़ दीजिए जिनका उद्देश्य ही हिंसा फैलाना था | सिस्टम का लोगों को संभालने का तरीका बहुत बदल गया है |

आपको नहीं लगता कि सरकार से सबसे बड़ी शिकायत अब यह है कि काम कम हुआ है, ये नहीं है की बिलकुल नहीं हुआ है, शायद काम छूट गए हों । लेकिन इसका अर्थ यह नहीं की होंगे नही । बदलाव यह है कि नाउम्मीदी नहीं है अभी ।

लोगों के एजेंडे पर मत जाइये । बस अपने आसपास देखिये । अगर कुछ बदला हुआ दिखे तो आप जानते हैं कि आपको क्या करना है |



#बदलाव

3 टिप्‍पणियां:

  1. सर
    ट्विटर पर आपकी टिप्पणी पढ़ी फिर ब्लॉग मिला। अच्छा लिखा है। पढ़ने, सबको बताने लायक।🙏
    अनुमति दें कि शेयर कर सकूँ।
    brahmanuvach.blogspot.com

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    1. अगर आपको लगता है कि शेयर किया जा सकता है तो अवश्य कीजिये , इसका लेख का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों की शंका के बादल हटाना है ।

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