बुधवार, 18 अप्रैल 2018

ज़ॉम्बी

जो महानुभाव अपना मस्तिष्क एवं विवेक का त्याग कर किसी विषय या वस्तु के प्रति अत्यंत आसक्त हो जाते हैं , हॉलीवुड शास्त्र में इन्हें ही ज़ॉम्बी की संज्ञा दी गयी है ।

लिब्रलत्व का कीड़ा काटे हुए को लिबटार्ड ज़ॉम्बी कहा जाता है। इनका काटा हुआ पानी भी नहीं मांगता।इनकी हरकतें आदि मानव से काफी मिलती जुलती हैं।
इन्हें पशु सामान भोजन,पशु सामान नग्नता और पशु सामान आचरण अत्यंत प्रिय होता है। ये वास्तव में समस्त सामाजिक व्यवस्थाओं को धता बता कर आदम युग के खुलेपन में जीना चाहते हैं ।
लिब्रलत्व के तत्व के संपर्क में आते ही दिमाग सड जाता है और मनुष्य में पाश्विक प्रवृत्ति घर कर लेती है ।

इनमे ही एक उप प्रकार के ज़ॉम्बी होते हैं जिन्हें फेमनिष्ठ जोम्बी कहा जाता है । ये भी प्रायः अपनी बुद्धि को ताड़ पर रखकर बनते हैं । इनकी मुख्य पहचान बात बात पर स्वयं को श्रेष्ठ और सनातन की किसी भी परंपरा पर अनर्गल प्रलाप करते देखा जाना है । इनको घूंघट और साडी पिछड़ापन लगता है और बुरखा आधुनिकता ।
आधुनिकता में अपना सर धुनते देखे जाते हैं ।

एक अन्य प्रकार के ज़ॉम्बी आये है बॉलीवुडटार्डस ये अलग ही चलते हैं । इनको ऊपर वाले किसी न किसी ज़ॉम्बी या एक से अधिक ज़ॉम्बी ने काटा हुआ होता है । ये सुविधा के अनुसार किसी पर भी हमला करते हैं और दोगलाई करते हैं । ये ज़ॉम्बी अत्यंत दोगले होते हैं ।

दोगलत्व के काटे हुए ज़ॉम्बी एक अलग किस्म की ज़ॉम्बी है । इनके दो या दो से अधिक मुंह होते हैं। कब किस मुंह से कौन सी बात कह दें पता नहीं चलता ।

दूसरे प्रकार के ज़ॉम्बी होते हैं चमचत्त्व के कीड़े से डसे हुए । एक बार कोई किसी का चमचत्त्व प्राप्त कर ले तो उसके बाद उसका दिमाग उपयोगी नहीं रहता । उसे केवल एक ही व्यक्ति की बात सुनाई और दिखाई देती है । सही गलत की पहचान नहीं रहती और ये रिमोट से चलने वाले प्राणी बन जाते हैं ।

तीसरे प्रकार के ज़ॉम्बी होते हैं पोलिट्रिक्ड ज़ॉम्बी । जो किसी को नेता मान कर उसके दीवाने हो जाते हैं । उस नेता की हर बाटी सही मानते हैं और बाकी सब उन्हें गलत लगते हैं ।
पोलिट्रिक्ड ज़ॉम्बी अक्सर एक दुसरे के संपर्क में आने से कम और अपनी तर्कशक्ति के ह्रास से अधिक बनते हैं । इनके दिमाग में पोलिटिकल कचरा भर जाता है और ये पॉलिटिक्स और असली जीवन में अंतर स्पष्ट नहीं कर पाते ।

चौथे प्रकार के जॉम्बी देखे गए है। रेलिजिस्टिक ज़ॉम्बी । ये वो हैं जो होते ठीक ठाक है लेकिन किसी धार्मिक प्रवचनकर्ता के प्रवचनों को सुनकर अपनी इच्छा से अपना दिमाग धर्म के नाम पर बेच आते हैं । इनके दिमाग में अत्यंत घृणा के अंकुर होते है । इनके लिए लड़ना-मरना कोई बड़ी बात नहीं होती । इनकी सबसे बड़ी खासियत है अपने ही धर्म के लोगों को निशाना बनाना । ये अपने ही धर्म के भोले भाले लोगों का दिमाग धो धा कर ज़ॉम्बी बना देते हैं ।

इन सभी प्रकार में ज़ोम्बीत्व और ज़ोम्बीत्व प्राप्त महानुभावों से हमें निश्चित दूरी बना कर रखनी चाहिए और अपनी रक्षा करनी चाहिए ।

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