शुक्रवार, 6 अप्रैल 2018

बाबा की हास्य गीता

बाबा के नाम से ट्विटर चलाने वाली काकीजी को सादर प्रणाम पहुंचे ।  बहुत प्रसन्नता हुई आपने अगडम बगडम कविता रची । चुनाव के माहौल में कविता रचना उसी प्रकार है जिस प्रकार भगवान महाभारत में गीता कह गए । हालांकि आप भगवान् को नहीं मानतीं पर कविता कहने से आपको कौन रोक सकता है ।

जैसे नारायण ने अर्जुन को धनुष उठाने के लिए प्रेरित किया, क्या पता एक दो कांग्रेसी चुनाव लड़ने को तैयार हो जाये । वैसे भी कुछ दिन पहले किसी ने बाबा को अगडम बगडम भाषण पकड़ा दिया और बाबा अपनी धुन में महाभारत, पांडव, कौरव जाने क्या क्या बड़बड़ा गए । इससे उन्हें दूर रखिए ।


ये संघियों के ग्रन्थ बड़े कंप्लीकेटेड होते हैं । पढ़ने वाले की समझ न विकसित हुई हो तो वात्सायन को वेदव्यास , वेदव्यास को वात्सायन समझ कर एक अन्य संसार की कल्पना ही कर सकता है । इन ग्रंथों में बातें बड़ी काम्प्लेक्स हैं । देख लीजिये न आप आज एक बाबा को मंत्री बनाने पर कविता कर रहीं है ,वहां संघियों ने एक बाबा को सिंहासन ही पकड़ा दिया ।


आपका राज होता तो तो बाबा को कुछ दिन अनशन पर बिठाते, फिर कुछ पानी छिड़कते, धुआं फैलाते और फिर उसके बाद रातो रात बाबा की सुताई कर देते । इधर तो सरकार ने विरोध से पहले ही मामला सुलटा दिया । ऐसे थोड़ी ही होता है ।



पिछले दिनों किसानो आदिवासियों  को ढूंढ ढूंढ कर पैदल घसीट कर मुम्बई लाये, चलो कुछ तो बवाल होगा, लेकिन देविन्दर ने उनको पुचकार के लौटा दिया । फिर किसी बहाने अपने बूढ़े अन्ना की दिल्ली में लीला करवाई, पर देविन्दर वहां भी पहुँच गया और बात वहां भी नहीं बनी । मरता क्या न करता।आखिर महाभारत का लाक्षागृह वाला काण्ड करना पड़ा । 

हाँ तो हम कविता पर आते हैं , आपकी रचना बड़ी महत्त्वपूर्ण है और बताती है कि वोट के लिए कोट के ऊपर जनेऊ पहनने वाले हिंदुओं के बाबाओं से डरते कितना हैं । अब सच तो अपन को पता है नहीं, आपको पता होगा । लेकिन झूठ अपन को सब पता हैं ।


आपने क़यामत से कयामत तक बीजेपी सरकार रहने का आशीर्वाद दिया उसके लिए बीजेपी वाले बड़ी दुआएं देंगे । लेकिन ये भी सच है कि क़यामत आ जाये तो भी बाबा से बुद्धि की बात सुन कर कान सुन्न ही होंगे । अभी तो चुनाव काल है, बड़ा कठिन समर है । समर की तैयारी कीजिये ।

कूलर AC वगैरह ठीक करवा लीजिये । देख लीजिये वेकेशन वगैरह लेना हो तो भेज दीजिये बाबा को । ट्विटर आप संभाल ही रही हैं और कर्नाटक सिद्धारमैया हार ही लेंगे अपनी दम पर । इतना विश्वास तो आपको अपने नेताओं पर करना होगा । लेकिन कविता जरूर लिखते रहिये और इकट्ठी रखती जाइये ।


जब 2019 का चुनाव की रणभेरी बजेगी तब ये कविताये सुनाना । ये गीता का रूप ले लेंगी । क्या पता किस किस को प्रेरित कर देंगी । शायद इतिहास में "काकी की गीता" या बाबा की "हास्य गीता" नाम से दर्ज हो जाए और बाबा के नाम से कोई नया "दीन-ए-गनदही" निकल आये।

आपको शुभकामनाएं।

शेष क्लेश कभी और।

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