को का कर रओ!!
अगर किसी मंगल-चंद्र के योग ने आपको सांसद बना दिया है तो समझ लीजिये आप स्वयंसिद्ध हैं, आपके श्राप से कुछ भी भस्म हो सकता है भस्म न होगा तो जड़ हो ही जाएगा। आप सांसद हैं तो दुनिया भर में खर्चा कीजिये बस संसद में चर्चा मत कीजिये, कागज़ फड़िये, किताबें, कुर्सियां फेकिये अध्यक्ष के सर पर चढ़ जाइये। उसपर अगर निलंबित कर दिए जाएँ तो धरना भी दीजिये। किसी कारण या काण्ड से अगर राज्य की सत्ता आपके हाथ आ गई है तो समझिये कि आप लगभग भगवान ही हो गए हैं। आप चाहें तो अपने विरोधियों को वोट देने वालों को राज्य से खदेड़ दीजिये। अपने विरोधी पक्ष ने नेताओं की हत्या कर के पेड़ पर लटकाते रहिये। जिसे चाहे जब चाहे उठवा लीजिये, जिसे चाहे जहाँ चाहे बिठा दीजिये। जिसे चाहे दबा दीजिये जिसे चाहिए उठा दीजिये। जिसे चाहे जमीन चट-पट कर के आवंटित कर दीजिये या खटपट कर के हथिया लीजिये। गली गली ठेके खुलवा दीजिये, और ठेकों के कमीशन से नशामुक्ति अभियान के विज्ञापन दीजिये। पन्द्रह-बीस लाख इधर उधर हो जाना तो इधर उधर हो जाना होता ही नहीं है। कलाबाजी, टोलाबाजी, कमीशन, हफ्ता, रंगदारी सब आय के साधन हैं, इनका भरपूर प्रयोग कीजिए।
स्वयं भले ही रीढ़विहीन हों लेकिन जिह्वा की अकड़ कम नहीं होनी चाहिए। चाहें तो राज्यपाल को जूते की नोक पर रख लीजिये और अगर आप राज्यपाल हैं तो प्रधानमंत्री को गरिया लीजिये, और अंदर से इटालियन हैं तो देश को ही गरियाते हुए विदेश जाकर देशहित का चिंतन कीजिये, को का कर रओ। कहीं गाजे का प्रयोग कीजिये, कहीं वाज़े का। इमरान आपका भाई हो और कनेडा से पैसा आता हो तो देश के प्रधानमंत्री का रास्ता भी रोक सकते हैं। राज्य आपका है पुलिस आपकी जब आप स्वयं सरकार हैं तो वैसे भी कोऊ का कर ले है।
हो सकता है आप स्वयं सरकार न हों, सरकारी कर्मचारी हों। परन्तु अवसर तो बराबर ही है। आप सरकारी दफ्तर में ड्राइवर हो जाइए और कलेक्टर की गाडी चलाइये। अगर विवाहित हैं तो आप कलेक्टर की लाल बत्ती वाली गाडी लेकर अपनी साली के विवाह में जाइये या साले के ससुराल जाकर स्वयं को कलेक्टर बता आइये। चाहें तो गाडी में पत्नी समेत निकलिए और गाडी को मंडी में घुसा दीजिये। गाडी आपके हाथ में है, कलेक्टर साहब कर क्या लेंगे और गाडी कलेक्टर साहब की है तो जनता और पुलिस क्या कर लेगी। सरकारी बाबू हैं तो दो-चार रजिस्टर-स्टेशनरी वगैरह घर ले जाने में क्या बुराई है। सरकारी स्कूल के शिक्षक या बाबू आदि के लिए तो सरकारों को विशेष रूप से अतिरिक्त ड्रेस, स्टेशनरी और किताबें भेजनी चाहिए। दो के बिल में एक मिलने वाले समोसे और बिस्कुट, सरकारी कार्यालयों में आते ही हैं। मीटिंग वगैरह में चार की आवश्यकता हो तो छह मंगवाकर दो समोसे सर्विस चार्ज की तरह चपरासी ले सकते हैं। बाल विकास जैसा कोई दुधारू दफ्तर हो और आप कायदे के आदमी हैं तो अपने विकास के अनेक रास्ते ढूंढ सकते हैं। जब आप सरकारी आदमी हैं तो निश्चित ही आप यह सब करने के बाद कह सकते हैं - को का कर रओ।
ऐसा ही प्राइवेट संस्थान में नौकरी करने वाले भी कर सकते हैं। ब्रेक एरिया में मिलने वाली मुफ्त कॉफ़ी हो या बिस्किट दिनभर आप जी भर के खाइये। शाम को कॉफ़ी को थरमस में भरकर घर ले जाइये और पत्नी के साथ बालकनी में बैठकर कॉफ़ी का आनंद उठाइये। अगर आपकी कम्पनी आपको अपने किसी आवश्यक निजी काम के लिए एक-आध घंटे के लिए जाने के लिए बाहर जाने की अनुमति देती है तो आप आराम से किसी मॉल का चक्कर लगा सकते हैं। शुक्रवार को फिल्म देख सकते हैं। टीम बॉन्डिंग के नाम पर मिलने वाली राशि पर साप्ताहिक लंच का कार्यक्रम रख सकते हैं। जिसमे अगर आप मैनेजर हैं तो रेस्टोरेंट वालों से कुछ सेटिंग वगैरह करके बिल में दस-बीस प्रतिशत की कमाई कर सकते हैं। अगर आपके बच्चे हैं तो उनके होमवर्क और असाइनमेंट के प्रिन्टऑउट दफ्तर से निकालना आपका वह अधिकार है जिसे आपने सातवां फेरा लेते हुए पंडितजी से प्राप्त किया था। कोई चिट्ठी कोरियर वगैरह करने के लिए लिफाफा कार्यालय में मुफ़्त मिलता ही है। अगर आप थोड़े जुगाडू हैं और मैनेजर के साथ कुछ कार्यक्रम वगैरह सेट कर सकते हैं तो आपके लिए आत्म-विकास परियोजनाएँ आदि बना सकते हैं, वर्ष में एकाध ऑनसाइट का चक्कर लगाने में आपको कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। अगर कोई संशय मन में उत्पन्न हो मन ही मन दोहराइए - को का कर रओ।