बुधवार, 18 अप्रैल 2018

व्यूह

महिषी कारिगसा के कक्ष में  संतरी याहैनक ने प्रवेश करते हुए कहा । ये ठीक नहीं हो रहा । ऐसे तो हमारी कमर टूट जायेगी । 

याहैनक अत्यंत क्रोधित और उत्तेजित था । 


महिषी का एक और वार निष्क्रिय कर दिया गया था । कुछ विषकन्याओं ने होलिका दहन से पूर्व किसी व्यक्ति पर आरोप लगते हुए कहा था कि उन पर किसी उद्दण्ड ने होलिका दहन के समय वायुगोलक में हीलक भर कर प्रहार किया था । चारों ओर होलिकोत्सव पर प्रतिबन्ध की मांग उठ खड़ी हुई थी । अवसर का लाभ उठा कर महिषी कारिगसा ने धर्मप्रवृत्त समाज पर प्रहार का व्यूह रचा था वह असफल रहा । प्रयोगशाला से समाचार आया था कि वायुगोलक में हीलक के अंश नहीं पाये गए । अतः समस्त प्रयोजन निस्तेज हो गया, और जनमानस महिषी का उपहास कर रहा था ।  किन्तु महिषी ने असत्यवाद में घोर तपस्या कर सिद्धि प्राप्त की थी । उन्हें उपहास से भय नहीं था । उनके तप का ही प्रताप था कि घोर से घोर असत्य बोलकर भी वे मुख पर सदैव मुस्कान बनाये रखतीं थी । गणित में ग की भी पहचान न रखने और सदा शीश-पद विहीन वार्ता करने में निपुणता के कारण महर्षि मीेडियाक्रुक ने उनको पंचमप्रवर्गजड़मति होने का वरदान प्रदान किया था । 

महिषी का विवाह पदीजरा नामक श्रेष्ठि से हुआ था । पदीजरा ने कच्छ के पूर्व सम्राट के विरुद्ध षड्यंत्रों में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया था । इनके कथनुसार के वर्तमान जम्बूदीप के शासक के प्रशंसक और नागरिक स्तर विहीन हैं । दोनो पूर्णतया एक दूसरे के पूरक थे । 

दोनों में अहम् श्रेष्ठस्मि की भावना दोनों को जनमानस से अत्यंत दूर रखती थी ।


याहैनक ने भूमि पर पदाघात करते हुए कहा , ऐसे तो हमारा एक भी वार सफल नहीं होगा । 

हीलक की कथा रचने में पूरे गुरुकुल के वाम सखाओं ने अपना रक्त स्वेद एक कर दिया था । 


काश प्रयोगशाला कह देती कि उस वायुगोलक में हीलक था, तो अगले वर्ष से होली पर मैं स्वयं सम्पूर्ण लिबरलगण के साथ नग्न नृत्य करता । परंतु न जाने क्यों उनको एक अंश भी न मिला । 


मोहतरमा तदखारब का क्या विचार है कारिगसा ने पूछा, उनके किसी प्रयास को सफलता मिली ? 


वे भी असंतुष्ट ही प्रतीत होती हैं , याहैनक ने कहा, आजकल उनके प्रयोजन भी कुछ सफल नहीं हो रहे । जो भी चेष्टा करती हैं दो चार दिन में उनकी वायु भी निष्काषित हो जाती है । पिछले दिनों महिषी ने जम्बूदीप के शासन के विरुद्ध मानवों पर अत्याचार करने का आरोप लगाया और विश्वपटल पर जम्बूदीप को कलंकित करने का प्रयास किया । पर वह भी कहीं जाता नहीं दिख रहा । 

वे आजकल मुम्बा देवी नामक स्थान के एक ऑनलाइन प्रहरी पर आसक्त हैं । उसके बुद्धिबल से इतनी आसक्त है कि उससे विवाह करने की इच्छा खुल कर जाता रहीं हैं । यहाँ तक कि वे उस प्रहरी को मूल्य देकर क्रय करने को भी तत्पर हैं । 


पर उनकी आयु?


आसक्ति आयु नहीं देखती महिषी। उन्हें छोड़िये और

आगे क्या करना है यह बताइये । हम कपाल पर हाथ रखकर विलाप तो कर नहीं सकते ।


हमें श्रेष्ठि पदीजरा से पूछना होगा । उनका अनुभव ही हमें अब कुछ नया करने में सहायक होगा ।

यह बोलकर दोनों श्रेष्ठि के कक्ष की और बढ़ गए । 


श्रेष्ठि अपनी ध्यानावस्था में मोदिध्ययन कर रहे थे, वे जब तक प्रतिदिन समाधिस्थ हो दो हज़ार दो बार मोदीशमनमन्त्र का जाप नहीं कर लेते उनकी देह में रक्त प्रवाह नहीं होता ।


श्रेष्ठि हमारा एक और प्रयास असफल हुआ, अब कोई और उपाय बताइये ।


मैंने पहले ही अपने अनुभव से कहा था, वायुगोलक में हीलक की बात किसी के हलक से नहीं उतरेगी । पर पंचमप्रवर्गजड़मति को कौन समझा सकता है । अब भुगतो , लोग उपहास करेंगे । 


अब वह विषय देखो जिसपर आमजन की विशेष संवेदनाएं जुडी हों । वार्ता जितनी संवेदनशील होगी हमारे लिए उतनी ही लाभप्रद है । अंतिम उद्देश्य तो सदा से ही जम्बूदीप के वर्तमान शासक को पदच्युत करना है । कहीं ऐसा न हो कि वह सोये हुए जनमानस को  जागृत कर दे और हमारे कुमार कभी सिंहासन तक न पहुँच सकें ।

अभी दक्षिण की ओर देखो, चुनाव काल है । जो कुछ भी खबर मिले सब हिंदुओं पर मढ़ दो। मुद्रा विलोपित होने का समाचार फैला दो । अपनी सेविका से लेकर अपनी पादुका तक का साक्षात्कार पत्रों में छपवा दो । मुम्बा देवी से चार अभिनेत्रियों को कुछ मुद्राएं देकर उनके गले में पट्टिकाएं दाल दो । सन्देश एक सा होना चाहिए । 


याहैनक तुम्हारा मित्र और मेरा प्रिय रमऊ दलिख कहाँ है । 


श्रेष्ठि, वो आजकल उपस्थिति अनिवार्य कर दी है गुरुकुल में।तो मेरी प्रॉक्सी लगा रहा है।परीक्षा आने वाली है न।


श्रेष्ठि ने दोनों को जाने का आदेश देते हुए, रात्रि विश्राम पूर्व गीत का आलाप लिया । 


https://youtu.be/vhcj2fdt9Pw

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