शुक्रवार, 27 अप्रैल 2018

चच्चा गुलाबीलाल

ये देश इसलिए है क्योंकि चच्चा गुलाबीलाल अलहाबादी  थे , गुलाबीलाल न होते तो भारत नहीं होता | दरअसल भारत की खोज तो चच्चा गुलाबीलाल ने ही की थी | उससे पहले तो भारत में केवल सांप और सपेरे ही रहते थे |  पर भारत खुजा हुआ नहीं था  |
गुलाबीलाल को सेवक बनने का बड़ा शौक था, इसीलिए उन्होंने अपना नाम गुलाबदास रखवा लिया था | गुलाबी तबीयत के मालिक गुलाबदास की आँखें भी गुलाबी थी  | जिनसे प्रभावित होकर एक शायर ने "गुलाबी आखें जो तेरी देखीं" नामक गीत लिखा |
चच्चा दरअसल बड़े सेवक थे ऐसा उनके एक वंशज पत्रकार जातपूछे ने बताया | पत्रकार जातपूछे वास्तव में प्रवक्ता थे, प्रवक्ता से कभी कभी पत्रकार का भेष धर लेते थे | भाषा की लच्छेदारी में जातपूछे का कोई जवाब नहीं था | कभी माइक लेकर सड़क पर निकल पड़ते ,कभी सड़क इनपर निकल पड़ती |
नयी सड़क पर लफत्तू के किस्से गढ़ते गढ़ते ये लोगों से आसानी से जुड़ जाते |  जब ये प्रवक्ता के रूप में होते तो अपनी पार्टी के गीत गाते | ये देश उन्हें चच्चा गुलाबदास की विरासत लगता|किसी ने अगर कुछ कह दिया तो इनको चच्चा खुद रात को सपने में आके बताते की फलां आदमी ने जो ये कहा है न कि "रात काली है " ये तो हम उन्नीस सौ बाइस  में कह दिए थे | देश की रातो पर कालिख हम ही तो पोत के गए हैं | नहीं तो पहले कहाँ रातें इतनी काली होती थीं | 
ये तो चच्चा गुलाबदास की  विरासत थी की आजतक गाँव गाँव में बिजली गुल रही | 
फिर प्रवक्ता से पत्रकार बनकर अपने सपने को सुनाते हुए जातपूछे सबको बताते, ये तो तुम्हारे पप्पा को भी नहीं पता था , हमें तो खुद चच्चा कान में बता कर गए हैं की ये उन्होंने कहा था | अब लोग चुरा रहे हैं | 

पत्रकार जातपूछे, के कुछ विशेष नियम थे जिसके अंतर्गत वे उसी अवसर पर आते थे जब वाम का दम फ़ूलने लगता था | वामा-गौरी से लेकर वामप्रस्थ के  टुकड़े टुकड़े समूह तक के लिए इनके प्राण हथेली पर होते थे | इनको विशेष सिद्धि प्राप्त थी ये हर चीज़ के विशेषज्ञ थे |

उनका मानना था कि गुलाबजल से लेकर गुलकंद तक की खोज चच्चा गुलाबदास ने की थी|यहाँ तक कि गुलगुले में जो गुल खिलता है वो भी चच्चा का खिलाया हुआ होता है|  
एक बार चच्चा ने जातपूछे को बताया कि, प्राचीनकाल में जब वेद पुराण लिखे जा रहे थे तो  वो लिखवाने वाले चच्चा खुद थे |
सामवेद का सा चच्चा का चा था जो अपभृंश होकर सा बन गया | रामायण में भी चच्चा ने बाल्मीकि का रोल निभाया था |  और महाभारत में अर्जुन के धनुष के रोल में चच्चा खुद थे |
महाराज विक्रमादित्य के पीछे लटकने वाले बेताल का रोल चच्चा निभाकर अमर हो गए |

चच्चा ने इस देश पर दो उपकार और किये एक तो स्वयं हो भारत रत्न देकर भारतं रत्न की वैल्यू बढ़ा दी और दूसरी अपनी विरासत छोड़ गए | वरना तो इस देश के पास था ही क्या ?

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