"चाचा सुने है एलियन आ रहे हैं ?" बबुआ ने माचिस की तीली कान में घुमाते हुए कहा ।
"कहाँ सुन लिए हो बे? दिनभर मुंह बाए सोते रहिते हो और अंत शंट सपना देख के हमको सुनाने चले आये, कान खुजाते हुए ! भक !"
"नहीं चाचा सही कह रहे हैं ,टीवी में देखे"
"सच में?"
"और नही तो क्या?"
"हाँ तो आन दो देख लेंगे एलियन फेलियन को । का बिगाड़ लेंगे ।
"
"अरे चाचा हमला कर देंगे हम पर ।
"
"अरे हटो बे ! इनके जैसे पचास आये और पचपन चले गए ये हमारा कुछ न बिगाड़ पाये ।
"
"अरे चाचा ये वाले बड़े खतरनाक हैं, बता रहे थे । सड़के खोद देते हैं, आग लगा देते हैं , गाड़ियाँ जला देते हैं । बम फोड़ते हैं बम |"
"
ज्यादा न बको, किसी पार्टी के कार्यकर्ता होंगे अपने नेता को चुनाव का टिकट न मिलने पर बवाल काट रहे होंगे ।"
"अरे नहीं चाचा एलियन हैं । बता रहे थे लोगों का दिमाग काबू कर लेते है, और फिर जो करवाना है करवा लेते हैं ।
"
"अबे ये सोशल मीडिया के कैम्पेन वाले रहे । कन्नौज अना लटका वाले । बहुत हुडदंग मचाये हैं । लोगों को अपना कुछ सोचने ही नहीं देते। रोज़ अपना नया बवाल मचा के जिंदगी खराब कर रखी है ।"
"तुम्हारा मतलब कैम्ब्रिज अनालिटिका वाले ?"
"हाँ वही"
"अरे नहीं चाचा एलियन हैं, ये दिमाग काबू कर लेते है और भुच्च बना देते हैं फिर कुछ बूझता नहीं है ।"
"हमको लिबरल समझे हो? जो कुछ बूझे बिना लपर लपर बोलते फिरेंगे | इतना भूसा नही खाए हैं छुटपन में कि हम बैल बुद्धि हो जाएँ |
देखो बिटुआ हम जब छोटे थे तो अम्मा हमको अपना दूध पिलाई रही, तो हमारा दिमाग़ चलता है आदमी जैसा |
जब तुम छोटे थे तो तुम्हरी अम्मा तुमको गैया का दूध पिलाई रही, तो तुम हो गये गौ-बुद्धि और ये शहरी लिबरल जब छोटे रहे न, तो इनको मिला पावडर |
तो इनके दिमाग़ मे पावडर ही भरा हुआ है | कुछ ठोस सोच ही नही सकते | हमरे दिमाग में पावडर नहीं भरा है बबुआ |"
"अरे चाचा इन एलियनों में ग़ज़ब का पावर है | एक सिंगनल भेजेंगे और तुम उनके गुलाम जाओगे |"
"हमको तुम फिलम की हीरो-हिरोइनी समझे हो? जो सिग्नल मिलते ही खड़े हो जाएँगे तख़्ती लटकाकर |"
"चाचा इनका दिमाग अतना बंद काहे रहता है ,कोनऊ एलियन कंट्रोल करता है का?"
"का पता बबुआ कौन कंट्रोल करता है । एक आदमी गया था हमारे यहां से दुबई । का पता वही एलियन बन के इनके दिमाग कण्ट्रोल करता हो |"
"चाचा लेकिन ये एलीयन होता है, कभी देखे हैं?"
"एलीयन तो नही देखे लेकिन ईंट-एलियन ज़रूर देखे हैं | कहने को बरसों तक इसी धरती पे मूँग दलते रहे | एक दिन पूछा जो दल के ले गये हो वो दाल दिखाइए तो |
तो कहते थे - धरती हमारी थोड़ी है | अभी तो दूसरे वाले राज चला रहे हैं | जब हम कबजिया लेंगे न इस धरती को, तब पूछिएगा |"
"तो का इन ईंट-एलीयन का धरती से नाता रिस्ता नही है ?"
"बबुआ धरती को माता समझते तो सबको अपना लेती, लेकिन जो जागीर समझते हैं, वो यूएफओ ही बने उड़ते
फिरते हैं और बन जाते हैं एलीयन, और उनके दिमाग़ मे भर जाता है ईंट-पत्थर |"
इतने मे लड़का दौड़ता आया |
"बापू जल्दी चलो | कोई ख़तरनाक एलीयन देश भर के एटीएम से नकदी गायब कर दिया है |"
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