गुरुवार, 30 मई 2019

कैसी छवि

कैसी छवि घनश्याम तुम्हारी,
कारे में उजरी, के उजरे में कारी?

आधे हो तुम, और आधे नहीं हो,
मगर देखता हूँ, ये पूरे तुमही हो। 

सब देखते हैं, दो नैना तुम्हारे,
कौन क्या मन में सोचे विचारे।

जगत को नचाती तुम्हारी मुरलिया,
दिखती है, न ही सुनाई दे छलिया।

कौन सी लीला, रचोगे मुरारी,
कोई न जाने थाह तुम्हारी।
                              

शनिवार, 18 मई 2019

का हुईए अब राम - चुनाव प्रचार के बाद

चुनाव प्रचार निपट चुका है। कई महीनों का शोर, टीवी पर आने वाले चाय, न्याय, आय और हाय हाय के नारे बंद हो गए। अब अगले तीन-चार दिन एग्जिट पोल के आंकड़े आतंक मचाएंगे। पूर्ण बहुमत, बहुमत, अल्पमत जैसे शब्द कानों में चुभने तक टीवी पर गूँजेंगे । अखबार आंकड़ों से पटे होंगे और नेता लोग अपनी थकान मिटाने के अनेक उपाय कर रहे होंगे। कुछ मंदिरों में माथा रगड़ेंगे और कुछ इफ्तारी में लग जायेंगे। इसमें भी दो राय नहीं कि चुनाव में दुश्मन जैसे लड़ने वाले बहुत से नेता एक ही मंच पर या फिर कहीं डिनर या लंच पर मुँह से मुँह लगाकर चुहलबाजी करते दिख जाएँ । कुछ गठबंधन की तैयारियों में होंगे कुछ अभिनंदन की । 
मोटा भाई कर्नाटक और मध्यप्रदेश की संभावनाएं छांटेंगे और कुछ बहन-भाई किसी डेस्टिनेशन पर १८ की रात को ही निकल जाएंगे । कुछ तो प्रचार समाप्त होने से पहले ही निकल गए। उनके निजी समर्थकों में घोर निराशा व्याप्त है। दो चार दिन बाद चले जाते तो क्या बिगड़ जाता। लेकिन काम समाप्त हो गया, इतने लम्बे चुनाव के पश्चात अवकाश तो बनता ही है। ईवीएम पर दोषारोपण की भूमिका तैयार की जा रही है, चुनाव आयोग को भी इस बार लपेटे में आने का भय है। डर और अविश्वास के दावों का दौर चालू हो गया है।
टिकट के लिए दावा ठोकने से शुरू हुआ क्रम जीत का दावा ठोके जाने के दौर तक पहुँच चुका है । अभी दावे करने के लिए दो-तीन दिन हैं जिसमे सभी लोग सभी प्रकार के दावे कर सकते हैं। सभी दल बहुमत का दावा कर सकते हैं। यहाँ तक कि चुनाव न लड़ने वाले दल भी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने का दावा कर सकते हैं । बुराई क्या है। राज्यसभा का स्वप्न भंग होने से कुपित कवि-सखा-गुरु अपनी चाणक्य-छोटी वाला दावा पहले ही कर चुके हैं और इस नाटक में धनानंद की भूमिका निभाने वाले अपनी हार का कारण अपने प्रतिद्वंदी को बता रहे हैं। प्रतिद्वंदी इन्हे जिताने के लिए लड़ते तो ये जीत भी सकते थे।  
कोई अपने दम पर तीन सौ पार करने का दावा कर रहा है और कोई स्वयं के वोट काटने में सफल होने से उत्साहित है। उधर पंचवटी के निकट हिरन बनकर उछलने वाले सत्ता में भागीदार होने का स्वप्न देख रहे हैं, जबकि उन्हें तो युद्ध से पहले ही बलि का पशु बनाकर समाप्त कर दिया गया है। किन्तु जय पराजय मन से होती है।  वे न लड़कर भी विजयी होने का दावा कर सकते हैं।  प्रचार की धूम और टी.आर.पी की दौड़ में हाँफते हुए सभी न्यूज़ चैनल अपने अपने कवरेज को सबसे तेज, निष्पक्ष या सटीक होने का दावा कर सकते हैं। 
चुनाव में सबसे अच्छा साक्षात्कार लेने का दावा रवीश कुमार जी कर सकते हैं और मोदीजी का सबसे अच्छा साक्षात्कार लेने का दावा चौरसिया जी कर सकते हैं। सबसे मनोरंजक प्रचार का दावा करने की आवश्यकता कांग्रेस अध्यक्ष को नहीं है। यह दावा उनकी तरफ से कोई भी कर सकता है।
शांत एवं बोरियत की ओर बढ़ते हुए चुनाव के क्लाइमेक्स में एक्शन सीक्वेंस डालने का दावा पश्चिम बंगाल की सरकार कर सकती है । 

उत्तरपूर्व में नाचते गाते हुए प्रचार लिए हेमंत विश्व शर्मा बधाई के पात्र है, और 'द डांसिंग पॉलिटिशियन' की उपाधि प्राप्त करने के दावेदार हैं। अगर सभी चुनाव प्रचार वैसे होते जैसे हेमंत जी ने किये हैं तो चुनाव वास्तव में राष्ट्रीय उत्सव बन जाता।  हवाबाज राजनेता का दावा वे स्वयं कर सकते हैं जिन्होंने चुनाव लड़ने की हवा तो बनाई किन्तु लड़ने की हिम्मत नहीं दिखाई। नाक की लड़ाई बिना प्रतियोगिता के नाक कटा कर समाप्त हुई। बुआ-भतीजे, बेटे से दुखी पापा, जेल गए पति के वियोग में दुखियारी पत्नी, भाई से दुत्कार खाये हुए भाई का दुःख जैसे फैमिली ड्रामा का भी खूब बोल बाला रहा। 

चुनाव लड़ने, लड़ाने और प्रचार करने वालों के आलावा चुनाव कराने वालों की उबाऊ तस्वीरों के बीच ग्लैमर का तड़का लगाने का दावा वो दो नीले-पीले वस्त्रों वाली सुंदरियाँ कर सकती हैं। 

लुटियन सुंदरियों एवं 'इलीट खान मार्किट दल' के सदस्यों के ह्रदय में पीड़ा व्याप्त है, चुनाव के परिणाम का विचार मन में आते ही उदर से रक्त मुख की ओर प्रवाहित होने लगता है। वे अपने मन को बहलाने हेतु अब प्रेम एवं दर्शन में डूबकर आनंदित होने का दावा कर रही हैं। सत्यवादी पत्नी होने का दावा सिद्धू जी ठोक चुके हैं। पति के 'सत्य'वादी होने का दावा आशुतोष जी की पत्नी कर सकती हैं। 
एक दावा हमारा भी है कि सच यह है कि गला सबका सूखा है। पता किसी को कुछ नहीं है कि क्या होने वाला है। मतगणना में कुछ और भी झमेले खड़े करने की कुछ लोगों की तैयारी अवश्य होगी। मतगणना इस बार आसान नहीं होने वाली। चुनाव को ही अलोकतांत्रिक घोषित करने में भी लोग चूकेंगे नहीं। राजनैतिक दलों का स्वयं का आंकलन क्या है यह हलवाइयों की आर्डर-बुक  देखने से पता चल सकता है। सत्ता-सुंदरी ने ये सात फेरे किसके साथ लिए हैं। यह बाकी सबके लिए कौतुहल का विषय है। कल के अंतिम चरण के मतदान के बाद चार दिन आनंद लीजिये दावेदारों के दावों का।

शनिवार, 11 मई 2019

हुआ तो हुआ


एक बार जंगल में पंचायत लगी. सियारों पर आरोप था कि उन्होंने जंगल का कानून तोडा है. सरपंच बैठे थे, वानर मीडिया सियारों और पंचों के मुंह में माइक ठूंस देने के लिए उछल कूद मचाये हुए था. पशु पक्षी कार्यवाही देख रहे थे.पंचायत की कार्यवाही शुरू की गई और एक पंच ने बोलना शुरू किया-वन में यह अनोखा मामला है जिसमे पशुओं के साथ उनके पूर्वजों पर भी आरोप लग रहे हैं. अपराध होते रहे और वनवासी चुपचाप देखते रहे, लेकिन अब जब मामले सामने आ रहे हैं तो कई पीढ़ियों के अपराधों के उत्तर इस पीढ़ी को देंगे होंगे.
पंच ने सवाल पूछा - क्या आपसे जंगल के संसाधनों का दुरूपयोग हुआ?
सियार- हुआ.  
पंच- क्या वही अपराध आपके पूर्वजों से भी हुआ था?
सियार- हुआ.
पंच- आपने दूसरे जंगल के अपने रिश्तेदार जानवरों को हमारे जंगल में बुला कर यहाँ शिकार किया. क्या यह सच में हुआ?
सियार- हुआ.
पंच- कानून को मजाक समझना, बाकी जानवरों को मूर्ख बनाना, दूसरों का शिकार छीनना, दूसरे जंगल के जानवरों से खाना छीनना, क्या यह अपराध आपसे हुआ?
सियार- हुआ.
पंच- आपको पता है इससे जंगल के पशु पक्षियों को बहुत कष्ट हुआ है?
सियार -हुआ.
पंच- आपको देखकर लगता तो नहीं है कि आपको अपने किये पर पछतावा है. आप हुआ हुआ कर रहे हैं. आप जानते हैं आपने अपराध किया है फिर भी दांत दिखा रहे हैं. आपके अपराध देखिये और शर्म कीजिये, क्षमा मांगिए .
सियार (दांत दिखाते हुए) - जो हुआ सो हुआ, हुआ तो हुआ.
पंच ने अपना सर पीट लिया, फिर कहा- ऐसा लगता है आपने जानबूझकर ही अपराध किए अनजाने में नहीं और अब आप स्वीकार भी कर रहे हैं. अब पंचायत फैसला करेगी.
बैठे हुए एक पंच ने कहा अभी चुनाव चल रहे हैं, चुनाव होने तक मामले पर सुनवाई टाल दीजिये. इससे चुनाव पर प्रभाव पड़ सकता है।पंच कुछ सोचकर बोले - स्वीकारोक्ति तो हो गई अब क्या बाकी रहा?
एक पक्षधर ने गुर्राते हुए कहा अगर कोई फैसला सुनाया तो हम केंचुआ से शिकायत कर देंगे और यह सुनते ही पंचायत की सभा विसर्जित हो गई. केंचुआ से पंच भी डरते हैं.
सियारों ने एक बार फिर से हुआ हुआ, हुआ तो हुआ की जोरदार ध्वनि की.


#केंचुआ ~ केंद्रीय चुनाव आयोग,केंचुआ जिसका भी सृजन है उसको धन्यवाद.