गुरुवार, 22 मार्च 2018

बिस्कुट का गबन

एक बार गणित की कक्षा चल रही ही | मास्टर जी ने पूछा , १५० को १० से भाग देने पर क्या मिलेगा?
बच्चे थोड़े अबोध थे तो मजेदार बनाने के लिए मास्टर जी ने सवाल थोड़ा घुमाया |
अगर लाला की दुकान से १५० बिस्कुट ले आएँ और तुम १० बच्चों मे बाँटा जाए तो सबको कितने बिस्कुट पैकेट मिलेंगे ?
मास्टर जी ने उत्तर समझते हुए कहा सबको १५-१५ बिस्कुट मिलेंगे सकते हैं |
बच्चे समझ गये और अगले सवाल पे बढ़ गये |
लेकिन सवाल बगल के मैदान में घास खोद रहे बंटाधारी ने सुन लिया | अब स्कूल मे जब भी बच्चे आते , उनसे पूछता .. क्यों भाई, १५ बिस्कुट मिले क्या ? रोज का नियम बना दिया | रोज पूछता १५ बिस्कुट का क्या हुआ ?
तुम्हारे मास्टर जी झूठे है , इतने दिन हो गये बिस्कुट नही दिए | दुकान के लाला को पैसे दे दिए और बिस्कुट लाए ही नही |
अक्सर कक्षा मे तीन तरह के बच्चे होते हैं | एक समझदार टाइप जो पढ़ाया हुआ समझते हैं , दूसरे होते हैं एवरेज टाइप जो पढ़ाया हुआ रटते हैं लेकिन पास होते रहते हैं , तीसरे टाइप के होते हैं ढपोलशंख जो न समझते हैं ना रटते हैं, दरअसल वे  स्कूल आते नही है भेजे जाते हैं | समझदार बच्चे तो बंटाधारी की बात सुनके सर पीट लेते | कुछ बच्चे सोचते की क्या सच मे बिस्कुट मिलना था? लेकिन आगे बढ़ जाते |

लेकिन तीसरे किस्म के बच्चो को यकीन हो गया कि मास्टर जी उनके बिस्कुट का गबन कर बैठे हैं, और कहते जब तक बिस्कुट नही मिलेंगे स्कूल नही जाएँगे | बंटाधारी इसी से खुश था की चलो जितनों ने छोड़ा , छोड़ा तो | मेरे पीछे घास खोदने दो चार तो रहेंगे |

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