सोमवार, 26 मार्च 2018

वी.आई.पी. दर्शन

शंख ,घंटे, डमरू सब भक्ति में खुद ही बज उठे । थोड़ी देर पहले जिस जगह से केवल बढ़ते रहिये, रुकिए मत जैसे धक्कान्तकारी-मन्त्र सुनाई दे रहे थे, वहीँ से अब वेद मन्त्र आने लगे । पुजारियों ने सुर में सुर मिलाया मंत्रध्वनि से वातावरण भक्तिमय हो गया । जल रही धूपबत्ती ने भी थोडा जोर लगाया और खुद आउटडेटेड चन्दन की होते हुए एक्जॉटिक लैवेंडर की खुशबु से वायु को सुगन्धित कर दिया । दिया जो फड़फड़ा के खुद को जल्दी बुझा देने के लिए अंधाधुंध जले जा रहा था वह भी थोडा शांत हो गया और शालीनता से जलने लगा। इधर उधर बिखरे फूल खुद उठे और कतारों में लग कर सज्जा में बदल गए।डालडा और तेल से बना प्रसाद थोडा पीछे हो गया और घी से बने भोग के लिये जगह बना दी। जल पात्र में बिसलेरी का जल डाला गया । भगवान के गले में पड़ी गेंदे की मालाओं ने अपना स्थान छोड़कर जाने में भलाई समझी वहाँ अब गुलाब की माला आने वाली थी । भगवान् की मूर्ति को थोडा व्यवस्थित कर दिया गया | जैसे परिजन बच्चों को किसी मेहमान के आने की सूचना पर बच्चों को कर देते हैं , और ताकीद देते हैं देखो तमीज से पेश आना , और मेहमान आएं तो उनको नमस्ते कहना । जूनियर पुजारिओं को वी. आई. पी पूजा विधि और स्त्रोत्र समझ दिए गए , और ऑब्सर्व करने को कहा गया । सभी आने वाले भक्तों के प्रवेश पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया प्रांगण का फर्श भी साफ़ किया जाने लगा, ताकि वी.आई.पी, चरण कमल मैले न हो सकें । मंदिर के बाहर भक्त और भिक्षुक दोनों वी.आई.पी जी ,के दर्शन को कतारों में लग गए ।
भगवान तो मंदिर में ही रहने थे पर ये बड़े वी. आई. पी हैं , कभी कभी ही दर्शन देते हैं । वी.आई. पी दर्शन को सब तत्पर और उत्सुक थे । वी. आई. पी जी सपरिवार पधारे, उनके चरण धुलाये गए, माला पहना के उनका स्वागत किया गया, विशेष चन्दन से तिलक किया गया । और तसल्ली से मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन -आरती हुई । (भगवान की या वी. आई. पी जी की पाठक के विवेक पर ) । तत्पश्चात सोलह सौ रुपये की आधा किलो मिलने वाली मेवे की मिठाई का प्रसाद खिलाया गया । पूजन से आत्मविभोर हुए वी.आई. पी ने गुलाबी रंग के दो नोट पूजा के थाल में रखते हुए भगवान से कहा - प्रभु कोई आवश्यकता हो तो याद कीजियेगा ।

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