मंगलवार, 19 मार्च 2019

जंगल का राजा


एक लोमड़ी सियारों के झुण्ड की तरफ बदहवास सी दौड़ी चली रही थी. सियार एक मरे हुए पशु का मांस नोचते हुए लड़ रहे थे.  कुछ कुत्ते भी वहीं बैठे हुए सूखी हडियों को चूसते हुए गुर्रा रहे थे. दो चार गिद्ध और कौए भी अपना हिस्सा ले कर भागने का मौका ढूंढ रहे थे.
लोमड़ी हाँफते हुए आई, पहले तो सियारों ने  गुर्रा कर नए आगंतुक को भगा देना चाहा. जब दुष्टजन सभा कर रहे हों वहां प्राणों का भय रहता ही है. लोमड़ी ने फिर भी एक सांस में कहा –“मैं तो खबर देने आई हूँ. खबर तो सुन लो.“
एक सियार सामने आया और बोला –“जल्दी कहो, लेकिन एक बोटी की भी अपेक्षा मत करना. अभी हम अपना खाना बांटने की परिस्थिति में नहीं हैं.”
लोमड़ी ने कहा -पहले खुशखबरी तो सुन लो शेर एक बीमारी के बाद चल बसा है. जंगल में शोक की लहर दौड़ गई है. शेर के डर से ही सभी जंगल का कानून मानते थे, उसके साथी और मित्र बहुत दुखी हैं. मुझे लगता है तुम सबको भी वहां चलना चाहिए.”
सियार ने लार टपकाते हुए कहा- “ओह शेर चल बसा. ये तो अच्छा ही हुआ अब हमारी बारी है जंगल पर दावेदारी ठोक देने की. अब हम जंगल पर राज करेंगे. चलो बता देते हैं ये सबको कि हम सियार ही अब सबसे शक्तिशाली है.”
लोमड़ी ने कुटिलता से मुस्कुराते होते हुए कहा- “लेकिन ऐसे समय में ये बात कहना ठीक रहेगा, एक दिन तो रुक जाते, उन्हें शोक तो मना लेने देते. “
“शोक! कैसा शोक? ये जो गिद्द की चोंच देख रही हो उस शेर के शव को फाड़ कर खा जाने के लिए अभी से फड़फड़ाने लगी है. हम सब सियार उसके मांस को नोच कर खा जाने को कब से दांत पैने कर तैयार बैठे हैं.”  सियार ने दांत भींचते हुए कहा.
गिद्दों ने कहा –“अच्छा हुआ मर गया, बहुत दिनों से शेर का मांस नही खाया और वे सब उस तरफ उड़ गए. “
लोमड़ी ने समझाने के बहाने उकसाने का  प्रयास किया – “थोडा तो सोचो, जंगल के बाकी पशु क्या कहेंगे? तुम्हें कैसे अपना राजा मान लेंगे? ये तो घोर असंवेदनशील बात कह रहे हो तुम.”
“यह जंगल है, सियार बोला, और यहाँ शक्ति ही सबकुछ है. आज शेरों का झुण्ड कमजोर है और हम ज्यादा है, आज निर्णय  कर के ही रहेंगे. जाओ सबको सूचना देदो हम पूरे झुण्ड के साथ शेर की गुफा पर कब्जा करने आ रहे हैं, जो भाग सकता है वो भाग जाए.”
लोमड़ी ने कहा – “लेकिन जंगल का कानून यह नहीं कहता, नया राजा चुना जायेगा कोई ऐसे ही कब्जा कर के राजा नहीं बन सकता.”
सियार ने अपने राजनैतिक ज्ञान का परिचय देते हुए कहा – “तो क्या और पशु जंगल पर राज करने के लिए नहीं सोच रहे होंगे. जिसमें थोड़ी सी भी शक्ति होगी वह जंगल का राजा बनने का सपना  जरूर देख रहा होगा.”
लोमड़ी ने कहा – “होगा लेकिन कोई ऐसी बातें खुले आम नही कह रहा होगा. थोड़ा धैर्य से काम लो. तुम वैसे तो शेर की एक दहाड़ से डर जाते थे, अब जब वह मृत पड़ा है तो उसका स्थान लेने के लिए लार टपका रहे हो. चाहो तो मैं तुम्हारे पक्ष ने माहौल बना सकती हूँ, ताकि तुम्हे पशु स्वीकार करें ,अन्यथा विरोध बना रहेगा.”

सियार ने कहा –“तुम्हे ऐसे ही बुद्दिमान नहीं कहते हैं, सोचो हमें जंगल का राज मिलते ही तुम्हे भी खाने के लिए तरसना नहीं पड़ेगा. तुम्हे मुलायम खरगोश पसंद हैं, हम तुम्हारे लिए खरगोशों की कतार लगा देंगे. लेकिन इससे पहले जंगल के पशु किसी को चुन ले जाओ तुम हमारे नाम की घोषणा  कर दो. हम पीछे पीछे आते हैं. “
लोमड़ी को सफ़ेद मुलायम खरगोशों के मांस की गंध आने लगी थी. वह जाकर अपने काम पर लग गई.

शोकमग्न शेर के शावकों को भयभीत करने हेतु कहने लगीअब तो तुम्हारे पिता नहीं रहे यह स्थान छोड़कर चले जाने में भलाई है. जाने कौन तुम्हारे प्राणो का शत्रु हो. “
उधर शेर के मित्रों से कहने लगीअब शेर तो रहा नहीं अब तुम मेरी बात मानो जिसे मैं कहूं उसे समर्थन देकर राजा बनाओ तुम्हे कोई कमी रहेगी.”
लोमड़ी अपने प्रयास में लगी थी, उसे जब विश्वास हो गया था कि सियारों की सत्ता आई ही समझ लो. उसने ये खबर सियारों को देने के लिए दौड़ लगा दी.  
इतने में ही शेर के मित्रों ने कहा - ये सियार हमें शोक करने का समय भी देंगे. अगर हम शोक में डूब गए तो अवश्य ही ये कोई षड्यंत्र कर जंगल का राजपाट हथिया कर सभी पशुओं का जीना मुश्किल कर देंगे . उसपर जो समर्थक शेर के नाम से ही उसके साथ सत्ता से जुड़े थे वे भय या लालच वश कहीं षड्यंत्र का शिकार हो जाएँ, जितना विलंब होगा सत्ता के उतने दावेदार उठ खड़े होंगे, अतः विलम्ब करना उचित नहीं है.
एक विद्वान ने कहा - एक दिन का शोक तो कर लेते आज ही सब करना आवश्यक है क्या?वो तो सियार हैं शव खाते हैं, लेकिन हम सत्ता के लिए अपने संबंधी का शोक भी करें? यह उचित नहीं.
तब एक मंत्री ने उत्तर दिया - हम शोक में पड गए तो सियार धमकेंगे और फिर कोई पशु सुखी रह सकेगा. यह समय कर्म करने का है.
इस प्रकार की मंत्रणा कर शेर के एक कुटुम्बी और दो समर्थकों को संयुक्त रूप से राजा घोषित कर दिया गया.
उधर जब सियारों को यह पता चला कि सत्ता उनके हाथ नही आई वे सब लोमड़ी पर ही टूट पड़े और उसे मार कर खा गए.

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