शुक्रवार, 20 मई 2016

वाह रे भारतीय राजनीति और परिवार ||

वाह रे भारतीय राजनीति और परिवार ||


परिवार का मुखिया - जो दिन रात मेहनत कर के भी गाली ख़ाता है ||
उसके साथ एक कट्टर सा ताउ - जो कुछ नही कहता लेकिन उससे डरते सब हैं ||
एक दूर का चिढ़ा हुआ चाचा - जो इतना चिढ़ा हुआ है कि घर से अलग ही हो गया है ||
एक भैया - जिसको पापा सबके सामने डाँटते रहते हैं ||
एक खाँसने वाला फूफा - जो हर बात पे रूठ जाता है ||
एक बूढ़े दादा जी , जो कुछ अच्छा होने पर खुश होते हैं, और बुरा होने पर कहते हैं - मैने तो पहले ही कहा था , लेकिन मेरी सुनता कौन है ||
एक ममाजी जो हर मौके पर साथ खड़े दिखाई देते हैं ||
एक कुढने वाली पड़ोसन , और उस पड़ोसन का नालयक बेटा, ओवरस्मार्ट बेटी और लालची दामाद ||
एक घर की कम पढ़ी लिखी बहू जो पड़ोसन और उसके परिवार के निशाने पर रहती है, लेकिन पड़ोसियों से लोहा भी वही लेती है ||
एक अम्मा जो सबको खिलाती है ||
एक वेल-सेटल्ड अमीर बुआजी जो राज शाही जिंदगी जीती हैं ||
एक गुस्सेवाली दीदी ||
एक गुमसुम सी बेन ||
जनता की आशिक-मिज़ाज़ी देखिए - कश्मीर की वादियों मे - महबूबा ||

और साथ मे मीडीया मे बैठी रविश, राजदीप, पुण्यप्रसून, अभिसार, बरखा, सारिका जैसी औरतें जो दिन रात सबके घरों मे कान लगाए बैठी रहती हैं की किसके घर मे क्या हो रहा है ||

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