गुरुवार, 26 जनवरी 2023

गणतंत्र दिवस की झाँकियाँ

सबसे आगे पश्चिम बंगाल की झांकी - महिला सशक्तिकरण का प्रतिनिधित्त्व करती हुई, झांकी में सबसे आगे एक महिला सफ़ेद साडी पहले हुए माइक पर चीख रही है खा खा खी खी, का का छी छी।

साथ ही हाथ में हथियार लिए हुए भीड़। बदलते हुए समाज का परिचय देते हुए।

उसके पीछे चेक वाली लुंगी पहने हुए लोग तोड़ फोड़ करते हुए। आग लगाते हुए। पटरियां उखाड़ते हुए। साथ में जलता हुआ एक स्टेशन, और जलती हुई रेल।

मेहनतकश लोग, जी तोड़ मेहनत करते हुए। जी के साथ सब कुछ तोड़ते हुए। अद्भुत सौंदर्य।

बंधे हुए लोहे के तार, उसके ऊपर से कूदते और भीड़ का हिस्सा बनते हुए 1:4:16 के अनुपात वाले सुखी परिवार।अतिथि देवो भवः की भावना से ओत प्रोत दृश्य।

सेक्युलर बांगला पॉपुलर बांगला की अद्भुत भावना का परिचय उजड़े हुए पंडाल,जिसमें कोई मूर्ती इसलिए नहीं रखी गई कि किसी की भावनाएँ आहत न हो।

साथ ही बंगाल में गृह उद्योग के रूप में बनते हुए कट्टे और बम का दृश्य। राज्य ने मालदा में डालडा के उत्पादन में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। यह दृश्य राज्य के धमाकेदार भविष्य को दर्शाते हुए। 

पीछे से फिर से खा खा खी खी चीखते हुए लोग। और साथ ही पेड़ों से लटके हुए धड़ ।

झांकी राजपथ पर आगे बढ़ती हुई। दर्शक गण जय श्री राम का उदघोष करते हुए।

अगली झांकी महाराष्ट्र की। झांकी में माइक पर खड़ा हुआ एक शायर। शायर के पीछे दो टायर। टायर के ऊपर कुर्सी और कुर्सी पर बड़े बड़े अक्षरों में लिखा हुआ मुख्यमंत्री तो केवल शिवसेना का होगा।

उसके पीछे एक बड़ी सी कड़ाही, कड़ाही में सरकार, और करछुल हिलाते हुए तीन पार्टियाँ। म्यूजिकल चेयर खेलते हुए MLA.

भरने के लिए सूखा तालाब ढूंढता हुआ एक नेता।

पीछे सर पकड़ कर बैठी हुई जनता। झांकी राजपथ से आगे बढ़ती हुई।

दर्शक दीर्घा में बैठे हुए फडणवीस और अमितशाह सब रिकॉर्ड करते हुए।

अगली झांकी राजधानी दिल्ली की। स्कूल, स्कूल से लगे ठेके, ठेके पर कतार। सड़क, सड़क पर जाम। पंडाल, पंडाल में बुजुर्ग महिलाएं। धरना, धरने में लंगर, लंगर में पिज़्ज़ा। धरना पर्यटन की खूबसूरत तस्वीर। लालकिले पर चढ़ाई करते लोग। जेल, जेल में मसाज कराते मंत्री। सेवा सर्वोपरी का सन्देश।

सबसे आगे दिल्ली के मालिक।मालिक सत्ता की गर्मी में,कुकर से चार सीटी लगने के बाद निकले आलू जैसा गर्म। मालिक के पास आसुरी अट्टहास करती नेत्री।एक दूसरे को पीटते पार्षद।यह नई दिल्ली की उभरती हुई सांस्कृतिक विरासत है।जानता है मैं कौन हूँ से मैं दिल्ली के मालिक का गुर्गा हूँ, तक का सफर।

लाचार दिखती पुलिस। सुहाना दृश्य। सशक्त लोकतंत्र की सशक्त होती जनता का प्रतीक। सबसे पीछे सीबीआई, सीबीआई के हाथ में झुनझुना। झुनझुने की झंकार पर नाचते स्मार्टमैन और साथी।   विपक्ष झांकी से भी नदारद।

अगली झांकी बिहार से।एक कुर्सी, कुर्सी के आस पास दौड़ते लोग। लोग बदल रहे हैं।कभी भगवा कभी नीले। लेकिन कुर्सी पर बैठा व्यक्ति स्थिर, हरा।हरियाली और बाढ़ का अद्भुत संगम। गाना बजता हुआ आइये न हमरे बिहार में, ठोक देंगे कट्टा कपार में। तीर,तीर पर लटकी लालटेन।

तीर और लालटेन के बीच में घुसने की कोशिश करता हाथ, जो कभी लालटेन की लौ से जलता कभी तीर की नोक से घायल होता।  लोग दिल्ली की झांकी में धक्कामुक्की करते हुए कूद कूदकर घुसते हुए। बनाया क्या है, कुछ समझ नहीं आ रहा। कुछ है, लेकिन हमको पता नहीं है क्या है। जो भी है सो है, बिहार का सत्य।

इस बार की झांकियों में एक नई झांकी। ऐतिहासिक लोकतंत्र की झांकी। संसद भवन, संसद भवन में घुसा हुआ मीडिया का माइक, जो संसद से ऊपर निकल गया है। जो पत्रकारों की पहुँच और "सूत्रों" का प्रतिनिधित्व करता है। उसके ऊपर मीलार्ड के बाल। जो न्यायालय की सर्वोच्च सत्ता और सम्मान का प्रतीक है।


सबसे नीचे इन सबके बोझ से दबी हुई जनता। मिडिल क्लास जनता झुकी कमर से दर्शकदीर्घा में मिडल क्लास वित्तमंत्री के आगे से हाथ जोड़कर अभिवादन करते हुए। वित्तमंत्री वहीं से बोझ उठाने वाले करदाताओं का धन्यवाद करती हुईं।  

झांकी अपनी ठसक दिखाते हुए कर्तव्य पथ पर अग्रसर।

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