मंगलवार, 1 सितंबर 2009

अप्रेज़ल

अप्रेज़ल

इस कहानी को काल्पनिक बनाने की पूरी कोशिश की गयी है ... इस कहानी के सभी पात्र कल्पनिक भी हो सकते हैं पर वास्तविकता से इस कहानी का कोई संबंध नही है ! पर अगर आप इसे अपने जीवन से जुड़ा हुआ पाएँ तो इसे एक संयोग ही कहा जाएगा !

-बबुआ ...सुने है की अप्रेज़ल पत्र आ गये हैं...श्रीवास्तव बाबू ने दफ़्तर मे कदम रखते हुए अपने साथी धीर बाबू से पूछा धीर बाबू से पहले ही कोई बोला "अर्र जल्दी अपने मेल देखिए आपको कितना मिला है हम सबको तो 100-200 रुपय महीने के बढ़ा दिया हैं "! श्रीवास्तव बाबू तनिक चिंता मे पड़ गये..बड़ी शंका और भय से अपनी डेस्क पर गये ओर सिस्टम ऑन कर दिया...दरअसल कंपनी मे कर्मचारियों की संख्या बढ़ जाने के कारण...श्रीवास्तव बाबू की टीम को दूसरी टीम के साथ अपने कंप्यूटर बाँटने पड़ते हैं...कंप्यूटर क्या कंप्यूटर का समय बाँटना पड़ता है... सुबह से शाम तक पहली टीम काम करती है और उसके बाद श्रीवास्तव बाबू की टीम !
वैसे श्रीवास्तव बाबू को अपनी टीम के मुखिया ही समझें...9-10 साल का तजुर्बा है इनका आई.टी. मे ! गोल-मुह, गोलम-गोल देह संरचना और उसपर हर आईटी के तजुर्बेकार कर्मचारी की ही तरह निकली हुई गोल तोंद !. ईश्वर की दया से उनकी न तो चाँद निकली है ना बाल सफेद हुए हैं,हमने तो ऐसे ही दर्शन किए हैं बाकी मेहंदी-डाइ की बात तो वो जानते हैं या उनकी वो ! हाँ भाई उनका एक भैया भी है. भैया नही समझे ..अर्रे नटखट छोटे श्रीवास्तव बाबू.. प्यार से श्रीवास्तव बाबू उन्हे भैया ही कहते है...वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दूँ गावों-देहातों मे अक्सर बड़े लड़के को भैया ही कहते हैं माँ बाप ! हमेशा हंसते रहने वाले बुलंद आवाज़ के मलिक श्रीवास्तव बाबू अचानक थोड़े बुझे से हो गये !
हाँ तो जब तक कंप्यूटर चालू हो रहा था श्रीवास्तव बाबू ने महसूस किया की केवल वो ही नही आज पूरे दफ़्तर मे रोशनी कम थी...यू कहिये तो सबके तेज़मयी चेहरे अपने अप्रेजल को लेकर तेज़हीन हो गये थे ! इस मद्धम रोशनी से उनका मन की शंका और प्रगाढ़ होती चली गयी ! इधर उधर से बस इन्ही बातों की चर्चा..अर्रे मुझे तो ब ग्रेड देकर भी 100 रुपये बढ़ाए हैं, मेरे 200...मेरे 2 प्रतिशत ....
श्रीवास्तव बाबू ने कंप्यूटर चालू होते ही देखा उनके कानो से धुआँ जैसे फर्र से निकल गया ... उनको 40 रुपये महीने का इनक्रिमेंट मिला था... अचानक भैया की आवाज़ उनके कानो मे गूँज उठी ... पापा हमको हालिकॉप्टेर छाईए...एक दिन श्रीवास्तव बाबू के भैया ने पूछा था. तब अपनी बुलंद आवाज़ मे बोले थे वो हाँ भैया हम तुमको हालिकॉप्टेर ला कर देंगे...बदमाशी तो नही करेगा भैया !अब श्रीवास्तव बाबू सोच रहे थे की 40 रुपये मे कौन सा हालिकॉप्टेर लाकर भैया को दे दूँ ! अभी बीवी बच्चो को गाँव मे छोड़ रखा था कि इस साल के अप्रेज़ल मे जो तनख़्वाह ( मज़दूरी ) बढ़ेगी तो बीवी बच्चो को अपने पास बुला लेंगे...
उन्हे उम्मीद थी की पिछले साल उन्होने जो जी तोड़ मेहनत की है ...दिन रात काम करके अपने प्रॉजेक्ट को जिस मुकाम पर पहुँचाया है और मॅनेजर बाबू से जो उनके मधुर संबंध बन गये हैं उससे उन्हे कुछ तो फायदा होगा ही....उन्हे बाबू से बड़े बाबू बनने का लोभ नही था पर इतनी तमन्ना ज़रूर थी की मॅनेजर बाबू 1000 रु मासिक तो बढ़ा ही देंगे...ताकि परिवार के लिए मकान किराए पर लिया जा सके... मकान भी नोएडा मे सस्ते कहाँ मिलते है.. 2 कमरे के घर के लिए आधी पगार ही माँग लेते हैं लोग. उपर से गले मे पड़े लाल पट्टे को देखकर लोग कुत्तों की तरह नोचने को बैठे रहते हैं. आई टी कंपनी मे काम करने वालों की विडंबना यही है... सब्जी वाला भी गले मे पड़े पट्टे को देखकर भाव दुगने कर देता है...अस्पताल जाओ तो काम और कंपनी देखकर इलाज़ किया जाता है. कोई बस कह तो दे आई टी कंपनी मे काम करता है... मामूली पेट दर्द के लिए भी हज़ारों के बिल बना देते हैं. ! फिर जब घर ढूँढने निकलो तो मकान मलिक को लगता है यही हमारा खोया हुआ बेटा है जो सब-कुछ हमारे लिए ही कमा रहा है जो कमाएगा बस हमारे चरणों में रख देगा उपर से मकान मलिक की उम्मीद की एक साल पूरा होते ही 10% किराया बढ़ा देगा...आदमी की तनख़्वाह इतनी नही बढ़ती जितना किराया बढ़ जाता है !
अगर आज श्रीवास्तव बाबू के दादाजी भाई उनके ही क्यू किसी के भी दादाजी मकान का किराया सुन लें तो हृदयाघात हो जाए...इतने मे तो 2मकान अपने नाम पर रिजिस्टर हो जाते उनके जमाने मे !
सो हुआ यूँ की भैया के हालिकॉप्टेर की उड़ान एलेक्ट्रॉनिक से प्लास्टिक के चाबी वाले खिलोने पर आ गयी थी ! श्रीवास्तव बाबू की पत्नी को अभी अगले वर्ष के अप्रेज़ल तक गाँव मे ही रहना था...और श्रीवास्तव बाबू सोच रहे थे फिर कहीं किसी के साथ किसी कोने मे पड़ा रहना होगा एक वर्ष और !
श्रीवास्तव बाबू ने अपने चारों तरफ देखा तो सारे चेहरों पर सपनो को चूर होते पाया ... कोई अपनी बहन की शादी मे 4 पैसे ज़्यादा खर्च करने की सोच रहा था ... किसी ने आगे पढ़ने की योजना बनाई थी.... कोई विवाह को लड्डू खाना चाहता था ..कोई अपने माँ बाप को अपने पास बुलाना चाहता था... कोई अपने भाई को पढ़ाना चाहता था... हर किसी की अपनी ज़रूरतें थी ... अपने सपने थे ...अपनी जिंदगी थी ...
ये सब कंपनी के ही तो हैं ...कंपनी ही इनको दाल रोटी देती है....जो सोच रहे थे की दाल मे एक चम्मच घी डाल कर खाएँगे उन्हे आज महसूस हो रहा था की दाल मे एक चम्मच घी नही एक ग्लास पानी बढ़ गया है...क्योंकि तनख़्वाह तो बढ़ी नही पर दाल की कीमत ज़रूर बढ़ गयी है...और बड़ा-बनिया तो जानता ही है कि ये आई टी वाले हैं ..सो लूट सको तो लूट लो !।
सो ये सब सोचते सोचते श्रीवास्तव बाबू का मन उचट गया और वे चल पड़े कॉफी मशीन की तरफ कॉफी लेने...जैसा की सारे कर्मचारी करते हैं... लौटकर लगभग उंघते हुए धीरबाबू से पूछा क्यू भाई आज अभी से उंघ रहे हो अभी तो शिफ्ट शुरू हुई है ... धीर बाबू बोले भाई सुकून की साँस लो और सो जाओ ... कंपनी पैसे नही देती तो क्या रात बिताने के लिए एसी की ठंडक तो देती है...इतनी तनख़्वाह मे जो घर हमने लिया है पहले तो गर्मी फिर ख़टमल और फिर हमारे रूम-मेट नही सोने देते...सो भाई कम से कम नींद तो पूरी करने दो.. और धीर बाबू चुपचाप अपनी डेस्क पर सो गये और श्रीवास्तव बाबू कॉफी की चुस्की लेते हुए सोचने लगे की इस बार अपनी घरवाली को क्या समझाएगे !

9 टिप्‍पणियां:

  1. Bahut Barhia... Aapka Swagat hai...isi tarah likhte rahiye


    Mere Blog Par Bhi Ek Nazar Daalein:

    http://hellomithilaa.blogspot.com
    Mithilak Gap...Maithili Me

    http://mastgaane.blogspot.com
    Manpasand Gaane

    http://muskuraahat.blogspot.com
    Aapke Bheje Photo

    जवाब देंहटाएं
  2. bahut he badhiya likha hai aapne. Bilkul kisi expert aur expirience writter ki tarah sari hakikat sabdon me udelee hai.

    जवाब देंहटाएं
  3. sahee hai kahaanee chhote paragraafon men ho to samajh men aatee hai.

    जवाब देंहटाएं
  4. आप सभी का बहुत धन्यवाद ! आपकी प्रतिक्रियाएँ एवं मार्गदर्शन मिलता रहे तो बेहतर लिख सकूँगा !

    जवाब देंहटाएं
  5. आपकी पोस्ट पढ़कर बहुत ख़ुशी हुयी !
    आशा है आगे भी आप ऐसी ही पठनीय रचनाएं लिखते रहेंगे !

    पुनः आऊंगा !

    हार्दिक शुभ कामनाएं !
    --

    जवाब देंहटाएं
  6. sir.. story bahut hi achchi lagi or makan maleek sach me ek saal me 10% kiraya bada dete hai ye meri zindgi se milta hai ...hahaha..

    nice story very good.

    Deepak"bedil"

    http://ajaaj-a-bedil.blogspot.com

    जवाब देंहटाएं
  7. Ati uttam... man ki peeda aise undeli hai ki bhav vibhor ho uthe hum...

    जवाब देंहटाएं