#मंत्रालयों_की_दरकार
बोले ये ढक्कन नहीं है ये हमारी ईमानदारी और आपके प्रति समर्पण है ।
हमारे देश में नेता होना आम बात है, अगर हम आसपास देखें तो हर चौथा आदमी नेता होता है । सड़क पर निकलते ही हम पाते हैं कि हमारे आगे चल रही लूना से लेकर सफारी तक में फलां पार्टी का सचिव, अधिकारी या किसी न किसी प्रकार का अध्यक्ष सफ़र कर रहा होता है । इसलिए नेता हो जाना आम बात है। लेकिन ख़ास बात है मंत्री हो जाना ।
मंत्री बनने पर नेता को वही सुख प्राप्त होता है जो "राजा मंत्री चोर सिपाही" खेलते समय मंत्री की पर्ची मिलने पर होता था। मतलब अलग ही तरह का चेहरे के भाव पढ़ने का खेल हुआ करता था वो भी । आम लोग उसको तुक्का मार खेल समझते थे लेकिन वास्तव में खिलाडी वही होता था जो सामने वाले के आव भाव समझ कर पहचान ले कौन चोर है।
ऐसे ही नेता लोग का है लोगों के चेहरे के भाव पढते हैं । जो डरा सहमा सा दिखा बस उसी को पहचानना और उसी पर रौब दिखाना है ।
जिसके हाथ में राजा की पर्ची लग गयी उसका तो अलग है, वो ऊपर से बस कहता है मंत्रीजी क्या चल रहा है बताओ ?
और इधर से मंत्री जी खेलने में लग जाते । सबसे संतुष्ट लोगों को ढूंढ निकालते और राजा के सामने खड़ा कर देते देखो जी सब मजे में ।
लेकिन जो नेता बनता है वह मंत्री तो बनना चाहता ही है । वैसे तो चोर और सिपाही भी मंत्री ही बनना चाहते हैं । लेकिन हमारे यहाँ मंत्रालयों की बड़ी कमी है ।
इस कमी को और बढ़ा देते हैं पीयूष गोयल जैसे लोग बताइये रेल, कोयला और वित्त जैसे बड़े बड़े मंत्रालय लेकर अकेले बैठे हैं ।
इन मंत्रालयों ने ही पिछली कई सरकारों में बड़े बड़े झंडे गाड़ दिए हैं । कुल मिलाकर पीयूष जी ने कई नेताओं की मंत्री बनने की संभावनाओं को दबा रखा है । कई नेताओं की भावनाये भड़की हुई है ।
इन्ही मंत्रालयों ने पिछली कई सरकारों के समीकरण बिगाडे भी हैं बनाये भी हैं । कई बार तो एक मंत्रालय देकर पूरी पार्टी का समर्थन भी लिया दिया गया है ।
लोगों का मानना है कि हर मंत्रालय में कम से कम दो मंत्री तो होने ही चाहिए ऐसे में नेताओ को मनवांछित सम्मान भी मिल सकता है और मंत्रालयों को अलग अलग मंत्री भी । और ऐसे में शायद कुछ झंडे गाड़ने का मौका भी मिल जाए ।
कुछ मंत्री फीते काटने में व्यस्त हैं । लोगों को आश्चर्य है की किया तो इन्होंने कुछ है नहीं लेकिन ये फीते काट किसके रहे हैं । पता चलता है की कुछ निजी कालेजों और होटलों के फीतों के अलावा गृह प्रवेश और सामुदायिक शौचालयों तक का उद्घाटन फीते काट कर कर रहे हैं ।
पिछले दिनों तो एक सड़क के बीचों बीच पंद्रह सालों से खुले हुए गटर पर ढक्कन क्या लगवा दिया एक पार्षद जी ने सभा ही बुला ली ।उद्घाटन भाषण सब कर दिया गया ।
बोले ये ढक्कन नहीं है ये हमारी ईमानदारी और आपके प्रति समर्पण है ।
वैसे कुछ विशेष लोग हैं जो खाली बैठे हुए हैं और उन्हें कुछ काम जरूर दिया जाना चाहिए ।
मेरे विचार में एक उद्घाटन मंत्रालय होना चाहिए । जिसमे दस पंद्रह वरिष्ठ नेताओं को रख देना चाहिए । जब बाकी मंत्रालयों के मंत्री काम कर रहे हों, अगर वे करते हों तो , तब ये उद्घाटन मंत्रालय के मंत्री जाकर जगह जगह उद्घाटन करते रहें । इससे कुछ नेताओ को मनवांछित सम्मान भी मिल सकेगा और मंत्रालय भी और सरकार से असंतुष्ट नेताओं की संख्या में कमी भी आएगी । इस मंत्रालय के लोग देश में सभी प्रकार के उद्घाटनों के लिए जिम्मेदार होंगे । वे सड़क से लेकर नहर तक, शौचालय से लेकर गटर तक, कालोनी से लेकर शहर तक का उद्घाटन कर सकेंगे ।
इसमें उन सभी फीता काटू लोगो को डाल देन चाहिए जो काम नहीं उद्घाटन करने लिए मंत्री बने हैं ।
एक मंत्रालय गाली मंत्रालय होना चाहिए , जो लोगों से मिलने वाली गालियों का हिसाब रख सके । इसका इंचार्ज उन लोगों को बनाया जा सकता है जो सत्ता में रहने पर बहरे हो जाते हैं ।
एक मंत्रालय रूठो-मनाओ मंत्रालय होना चाहिए , इसका इंचार्ज किसी चाशनी की जुबान वाले शायर को बनाया जाना चाहिए । जो रूठों को मना सके ।
इससे बात बात पर रूठ जाने वाले सांसदों के साथ विभिन्न संगठनों को मना सके । हालांकि आजकल कवि स्वयं रूठ रूठ कर पार्टियों से किनारा कर रहे हैं । उन्हें अगर कोई मंत्रालय दे दिया जाता तो आज भी वे रूठों को मनाने का काम कर रहे होते ।
साथ ही एक मंत्रालय धरना आंदोलन मंत्रालय बनना चाहिए जो आंदोलन करवाने और उसका संचालन करने की जिम्मेदारी ले । मसलन अन्ना जी के आंदोलनों का वर्ष में कम से कम दो बार रथयात्रा की तरह रामलीला मैदान में आयोजन करवा सके ।
अगर कोई मंत्री या मुख्यमंत्री धरने पर बैठना चाहे तो उसकी व्यवस्था संभाल सके ।
वैसे एक मांडवली मंत्रालय भी होना ही चाहिए, देखिये न ज़ी और जिंदल को मांडवली करने में कितना समय लग गया । मंत्रालय होता तो दोनों व्यापारियों में पहले ही समझौता करवा देता । लेकिन अब दोनों व्यापारी इसे सत्य की जीत बता कर एक दूसरे पर लगे संगीन आरोप वापस ले रहे हैं। धन्य हो ! आपकी राजनैतिक बुद्धि की।
फिर बनाने को तो कौन सा मंत्रालय और किसको मंत्री नहीं बनाया जा सकता , बस नीयत होनी चाहिए और इस सरकार में मंत्रालय बांटने की नीयत नज़र नहीं आती । हाँ आएगी कोई सरकार जिसमे हर नेता एक मंत्री होगा और हर मंत्री होगा लाला ।
मंत्रालयों की नई सूची बहुत खूब है। सुंदर ब्लॉग अजय
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